श्रीनगर: आतंकवाद और हिंसा की आग में जल रहे जम्मू-कश्मीर राज्य से दिल को सकूं पहुंचाने वाली एक खबर आई है जिसने साबित कर दिया कि चाहे कुछ भी हो जाए धर्म-जाति, नाते- रिश्तों से परे है मानवता और प्रेम. जिसके लिए अपनी मुस्लिम सहेली की जान बचने के लिए सिख सहेली अपने परिवार से भी लड़ जाने को तैयार है और अदालत की शरण में है. Also Read - सीमा पर आकंवाद एक गंभीर खतरा बना हुआ है, DDC चुनावों को भी बाधित करने की हो रही कोशिश: एम एम नरवणे

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परिजन हैं खिलाफ !

यहां एक सिख लड़की अपनी एक मुस्लिम सहेली की जान बचाने के लिए उसे अपनी किडनी दान करना चाहती है. उसकी सहेली की किडनी ख़राब हो चुकी हैं और डॉक्टर्स ने उसकी जान बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट करने की सलाह दी है. ऐसे में उसकी सिख दोस्त आगे आई है लेकिन उसे अपने परिवार के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. सिख लड़की के परिजन उसका विरोध कर रहे हैं, जिसके चलते प्रक्रिया में देरी हो रही है. इसलिए, अब उसने अदालत का रुख किया है. पूरा वाकया जम्मू के उधमपुर इलाके का है. यहां की एक सिख सामाजिक कार्यकर्ता 23 वर्षीय मंजोत सिंह कोहली ने अपनी एक किडनी 22 वर्षीय मुस्लिम सहेली समरीन अख्तर को दान करने का फैसला किया है, जो राजौरी जिला निवासी है.

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4 साल पहले हुई थी दोस्ती

मंजोत सिंह कोहली बताती हैं कि वो और समरीन 4 साल पहले एक दूसरे के सम्पर्क में आए और अब बहुत अच्छे दोस्त हैं. उन्होंने कहा, ‘‘हम पिछले चार साल से सहेली हैं और मैं भावनात्मक रूप से उससे जुड़ी हुई हूं, साथ ही मानवता में मेरा दृढ़ विश्वास है जो मुझे मुझे किडनी दान करने के लिए प्रेरित कर रहा है.’’ कोहली ने कहा कि चूंकि उनका परिवार उन्हें ऐसा करने की इजाजत नहीं दे रहा है इसलिए उन्होंने बिना किसी देरी के यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए अदालत का रुख किया है. ऐसा करके आज मनजोत जम्मू-कश्मीर समेत पूरे देश के लिए इंसानियत की मिसाल बन गईं हैं. उन्होंने ये पैगाम दिया है कि हर चीज से परे है मानवता, प्रेम और इंसानियत.

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