नई दिल्ली| बाबरी विध्वंस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अहम फैसला सुनाते कहा है कि आडवाणी, जोशी, उमा भारती समेत 13 पर आपराधिक साजिश का केस चलेगा. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रोजाना सुनवाई के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने कहा कि स्पेशल कोर्ट 2 साल में मामले की सुनवाई पूरी करे. इसके साथ ही. ये मामला लखनऊ  ट्रांसफर कर दिया गया है. मामले से जुड़े जजों के तबादले पर रोक लगा दी गई है. सीबीआई को आदेश दिया है कि इस मामले में रोज उनका वकील कोर्ट में मौजूद रहेगा. कोर्ट के इस फैसले के साथ ही एक बार फिर बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद फिर सुर्खियों में आ गया है।

पिछले तीन दशकों से अयोध्या विवाद भारतीय राजनीति का एक अहम हिस्सा बन गया है। बीजेपी और कई हिंदू संगठनों का दावा है कि राम का जन्म ठीक वहीं हुआ जहां बाबरी मस्जिद थी। बीजेपी ने समय-समय पर इस विवाद को कई मंचों पर उठाया, और अब जब 16 साल बाद उत्तर प्रदेश में पार्टी ने एक बार फिर सत्ता में वापसी की है तो अयोध्या विवाद सुलझाने पर चर्चा तेज़ हो गई है। इस  विवाद का इतिहास करीब 490 साल पुराना है। माना जाता है कि इसकी शुरुआत 1528 में हुई और वक्त के साथ-साथ ये और उलझता गया।

कब क्या हुआ?

1528: भारत में बाबर के हमले और कब्ज़े के दो साल बाद साल 1528 में बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया। इसे बाबर ने ही बनवाया था, इस वजह से इसका नाम ‘बाबरी’ मस्जिद पड़ा। लेकिन हिंदू संगठनों ने दावा किया कि इस मस्जिद का निर्माण यहां पर पहले से मौजूद मंदिर को तोड़कर किया गया है।

फोटो साभार: BBC

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1853: अंग्रेजों के शासनकाल में पहली बार अयोध्या में 1853 में सांप्रदायिक दंगे हुए। साल 1859 में अंग्रेजों ने इस विवादित स्थल पर बाड़ लगा दी और परिसर के भीतरी हिस्से के दो हिस्से कर दिए। एक हिस्सा मुसलमानों को और दूसरा हिस्सा हिंदुओं को देकर प्रार्थना करने की अनुमति दे दी। 90 सालों तक दोनों पक्ष इस स्थल पर इसी तरह से अपनी-अपनी प्रार्थना करते रहे।

1949: भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद के अंदर पाई गईं। इसके बाद एक बार फिर दोनों पक्षों में विवाद गहरा गया। इस बार दोनों पक्षों ने अदालत में ज़मीन को लेकर मुकदमा दायर किया जिसके बाद यहां ताला लगा दिया गया।

1984: विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में कुछ और हिंदू संगठनों ने मिलकर 1984 में राम मंदिर का निर्माण करने के लिए एक समिति का गठन किया। 1986 में जिला मजिस्ट्रेट ने हिंदुओं को प्रार्थना करने के लिए विवादित मस्जिद के दरवाजे से ताला खोलने का आदेश दिया। मुसलमानों ने इसके विरोध में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन किया।

फोटो साभार: AFP

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1989: विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के लिए विवादित स्थल के नजदीक राम मंदिर की नींव रखी। विवादित स्थल के पास ही मंदिर बनाने के लिए शिलाएं रखी गईं। 1990 में बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने राम मंदिर के लिए जनसमर्थन जुटाने के उद्देश्य से देशभर में रथयात्रा निकाली।

1992: विवादित स्थल पर राम मंदिर की नींव रखने के तीन साल बाद 1992 में विश्व हिंदू परिषद, शिव सेना और बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने 6 दिसंबर को बाबरी ढांचे को ध्वस्त कर दिया। इसके परिणामस्वरूप देशभर में हिंदू और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। इन दंगों में 2000 से ज्यादा लोग मारे गए।

2001:  बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर तनाव बढ़ गया। इस वक्त देश में अटल सरकार थी। बढ़ते तनाव के बीच ही विश्व हिंदू परिषद ने विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण करने के अपना संकल्प दोहराया।

2002: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने विवादित स्थल के मालिकाने हक की सुनवाई शुरू कर दी गई। इसी साल फरवरी में गुजरात के गोधरा में ट्रेन में आग लगा दी गई, जिसमें अयोध्या से कारसेवक लौट रहे थे। इसमें 58 लोग मारे गए। इसके बाद गुजरात में सांप्रदायिक दंगे हो गए जिसमें 1000 से भी ज्यादा लोग मारे गए। इसी साल मार्च महीने में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अयोध्या में यथास्थिति बरकरार रखी जाएगी। केंद्र सरकार ने कहा कि कोर्ट के फैसले को माना जाएगा।

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2003: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से विवादित स्थल पर पूजापाठ की अनुमति देने का अनुरोध किया जिसे ठुकरा दिया गया। अप्रैल में इलाहाबाद हाइकोर्ट के कहने पर पर पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग ने विवादित स्थल की खुदाई शुरू की, जून महीने तक खुदाई चलने के बाद आई रिपोर्ट में कहा गया है कि उसमें मंदिर से मिलते जुलते अवशेष मिले हैं। मई में सीबीआई ने 1992 में अयोध्या में बाबरी ढांचा गिराए जाने के मामले में उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित आठ लोगों के ख़िलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किए। अगस्त में भाजपा नेता और उप-प्रधानमंत्री ने विश्व हिंदू परिषद के इस अनुरोध को ठुकरा दिया कि राम मंदिर बनाने के लिए विशेष विधेयक लाया जाए।

2004: लालकृष्ण आडवाणी ने अयोध्या में अस्थायी राममंदिर में पूजा की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मंदिर का निर्माण ज़रूर किया जाएगा। इसे भी पढ़ें – बाबरी विध्वंस की कहानी तस्वीरों की जुबानी

2005: पांच हथियारबंद चरमपंथी हमलावरों ने विवादित परिसर पर हमला किया। इस हमलें में 5 चरमपंथियों सहित छह लोग मारे गए, हमलावर बाहरी सुरक्षा घेरे के नज़दीक ही मार डाले गए।

2009: 30 जून को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले की जांच के लिए गठित लिब्रहान आयोग ने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपी। इस रिपोर्ट को आने में 17 सालों का वक्त लगा। ये रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश की गई। आयोग ने अटल बिहारी वाजपेयी और मीडिया को दोषी ठहराया और नरसिंह राव को क्लीन चिट दी।

2010: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन को निर्मोही अखाड़ा, राम लला और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच बराबर बांटे जाने का फैसला सुनाया। लेकिन हिंदू और मुस्लिम दोनों ही पक्षों ने कोर्ट के फैसले को मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद दोनों ही पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 2011 में सुप्रीम कोर्ट नें हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया।

2017: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर बीजेपी ने राम मंदिर का मुद्दा उठाना शुरू किया। पार्टी ने चुनावों के लिए जारी घोषणापत्र में ‘संविधान के दायरे में सभी संभावित तरीकों से अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण’ की बात कही।

11 मार्च, 2017: सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुद्दे के निपटारे के लिए दोबारा से बातचीत के जरिए रास्ता निकाले जाने की बात कही।

31 मार्च, 2017: अयोध्या राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया। बीजेपी सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने जल्द सुनवाई की अर्जी दी थी। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जल्द सुनवाई संभव नहीं है। सभी पक्षों को और समय दिया जाना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने स्वामी को झटका देते हुए कहा कि आप तो केस में पार्टी भी नहीं हैं।