'हटाना है तो हटाओ...', ममता का सीधा चैलेंज- हार के बाद भी कुर्सी छोड़ने से इनकार, बंगाल में सियासी भूचाल

पश्चिम बंगाल में चुनाव हारने के बाद भी ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है. उन्होंने नतीजों को साजिश बताया और यहां तक कहा कि जरूरत पड़ी तो मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगी.

Published date india.com Published: May 6, 2026 11:13 PM IST
'हटाना है तो हटाओ...', ममता का सीधा चैलेंज- हार के बाद भी कुर्सी छोड़ने से इनकार, बंगाल में सियासी भूचाल

West Bengal Political Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उथल-पुथल देखने को मिल रहा है. विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद मुख्यमंत्री ममता ने पद छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है. उन्होंने इस हार को जनादेश नहीं, बल्कि एक ‘साजिश’ करार दिया है और खुलकर केंद्र सरकार को चुनौती दी है.

ममता बनर्जी ने अपने आवास पर पार्टी नेताओं और नवनिर्वाचित विधायकों के साथ हुई बैठक में दो टूक कहा, ‘अगर हटाना है तो हटा दें, राष्ट्रपति शासन लगाना है तो लगा दें.’ उनका ये बयान साफ संकेत देता है कि वह इस राजनीतिक स्थिति को एक विरोध के तौर पर देख रही हैं.

चुनाव नतीजों पर सवाल

तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दावा है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है. पार्टी नेताओं का कहना है कि कई सीटों पर काउंटिंग के दौरान अनियमितताएं हुईं और उनके कार्यकर्ताओं को मतदान केंद्रों से दूर रखा गया.ममता बनर्जी ने यह भी संकेत दिया है कि पार्टी इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है. उनका मानना है कि न्यायिक जांच के जरिए सच्चाई सामने लाई जा सकती है.

BJP की बड़ी जीत

इस चुनाव में भाजपा (BJP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत हासिल किया है. 294 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी को 200 से ज्यादा सीटें मिली हैं, जबकि TMC का आंकड़ा काफी कम होकर रह गया है. इस परिणाम के बाद राज्य की सत्ता बदलना लगभग तय माना जा रहा है. बीजेपी ने पहले ही सरकार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है.

संवैधानिक स्थिति क्या कहती है?

संविधान के अनुसार, किसी भी मुख्यमंत्री के पास विधानसभा में बहुमत होना जरूरी है. मौजूदा हालात में टीएमसी (TMC) के पास बहुमत नहीं है, इसलिए सरकार का बने रहना संभव नहीं है. विधानसभा का कार्यकाल खत्म होते ही राज्यपाल नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रण दे सकते है. ऐसे में ममता बनर्जी का पद खुद समाप्त हो जाएगा, चाहे वह इस्तीफा दें या नहीं.

पार्टी का रुख और विरोध

टीएमसी (TMC) नेताओं ने ममता के फैसले को ‘प्रतीकात्मक विरोध’ बताया है. उनका कहना है कि यह लोकतांत्रिक तरीके से अपनी असहमति जताने का तरीका है. अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) समेत कई नेताओं ने ममता का समर्थन किया और कहा कि पार्टी इस मुद्दे को अंत तक लड़ने के लिए तैयार है.

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आरोप-प्रत्यारोप तेज

जहां TMC चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर आरोप लगा रही है, वहीं चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार और कड़ी निगरानी में हुई है. बीजेपी ने भी इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा है कि ये हार स्वीकार न करने का बहाना है। (PTI के इनपुट के साथ)

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