पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ गई हैं. पहले TMC के 58 विधायकों ने अलग गुट बना लिया. अब अभिषेक बनर्जी को ED का समन मिला है. प्राइमरी टीचर भर्ती घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम बुधवार को अभिषेक बनर्जी के घर पहुंची. ED ने TMC सांसद को समन दिया. उन्हें 15 जून को पेश होने को कहा गया है. इस कार्रवाई के बाद मामले को लेकर सियासी हलचल भी तेज हो गई है.
आइए जानते हैं कब हुआ था शिक्षक भर्ती घोटाला और इससे अभिषेक बनर्जी के क्या कनेक्शन हैं?
2014 में हुआ था शिक्षक भर्ती घोटाला
बंगाल में हुआ यह घोटाला 2014 का है. पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती निकाली थी. इसके लिए प्रक्रिया 2016 में शुरू हुई थी. उस वक्त पार्थ चटर्जी शिक्षा मंत्री थे. इस मामले में गड़बड़ी की कई शिकायतें कोलकाता हाईकोर्ट में दाखिल हुई थीं.
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि जिन कैंडिडेट के नंबर कम थे, उन्हें मेरिट लिस्ट में टॉप पर रखा गया. कुछ कैंडिडेट का मेरिट लिस्ट में नाम न होने पर भी उन्हें नौकरी दे दी गई. ऐसे लोगों को भी नौकरी दी गई, जिन्होंने TET परीक्षा भी पास नहीं की थी.
2022 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने CBI को दिया जांच का आदेश
ऐसी खबरें थीं कि उम्मीदवारों ने सिलेक्शन टेस्ट में फेल होने के बाद सिलेक्शन के लिए 5 से 15 लाख रुपये तक की रिश्वत दी थी. ये घोटाला पार्थ चटर्जी के शिक्षा मंत्री रहने के दौरान हुआ था. इसके बाद 2022 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच CBI को दे दी. पैसों से जुड़ा मामला होने के कारण ED भी जांच में शामिल हो गई.
ED ने पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को किया गिरफ्तार
जुलाई 2022 में ED ने पार्थ चटर्जी और उसकी करीबी अर्पिता मुखर्जी को गिरफ्तार किया. गिरफ्तारी के बाद ममता बनर्जी ने चटर्जी को पद से हटा दिया और पार्टी से भी बर्खास्त कर दिया.
सितंबर 2022 में CBI ने दाखिल की चार्जशीट
30 सितंबर 2022 में CBI ने मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की. इसमें पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी समेत 16 लोगों के नाम थे. पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी तब ED की गिरफ्त में थे. पार्थ 23 जुलाई 2022 से जेल में हैं, उनकी जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं. TMC विधायक और स्टेट प्राइमरी एजुकेशन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष माणिक भट्टाचार्य को ED ने 11 अक्टूबर 2022 को गिरफ्तार किया गया था.
350 करोड़ रुपये से ज्यादा का है घोटाला
मार्च 2023 में ED ने बताया कि ये घोटाला 350 करोड़ रुपये से ज्यादा का है. इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड TMC का एक अन्य गिरफ्तार यूथ विंग नेता कुंतल घोष है. पूछताछ के दौरान कुंतल घोष ने आरोप लगाया था कि एजेंसी उस पर अभिषेक बनर्जी का नाम लेने के लिए दबाव बना रही है.
इस घोटाले से अभिषेक बनर्जी के क्या कनेक्शन हैं?
शिक्षक भर्ती घोटाले में अभी तक अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोई अदालत द्वारा सिद्ध आरोप नहीं है. उनका नाम जांच के दौरान कई बार सामने आया है, जिसके कारण उनका नाम इस मामले से जुड़ा रहा है. इसलिए CBI और ED ने उनसे कई बार पूछताछ की है.
2025 में CBI की एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट में अभिषेक बनर्जी का जिक्र था. विपक्ष ने इसे TMC सांसद अभिषेक बनर्जी से जोड़ा, लेकिन CBI ने दस्तावेज़ में व्यक्ति की स्पष्ट पहचान नहीं बताई थी. TMC ने आरोप लगाया कि यह राजनीतिक रूप से उनकी छवि खराब करने की कोशिश है.
अभिषेक बनर्जी लगातार कहते रहे हैं कि उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है. केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है.
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