नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस और एआईयूडीएफ सांसदों ने नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में संसद भवन परिसर में मंगलवार को धरना दिया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की. लोकसभा में सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति की रिपोर्ट पेश की गई थी. इसमें तृणमूल समेत कुछ दलों असहमति का नोट दिया था. मंगलवार को संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले तृणमूल सांसदों एवं एआईयूडीएफ के बदरूद्दीन अजमल ने संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना दिया और नारेबाजी की.

तृणमूल सांसदों के हाथों में पोस्टर थे जिन पर लिखा था ‘मुझे मेरे देश से मत निकालो, मैं भारत का नागिरक हूं.’ तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी नागरिकता संशोधन विधेयक को पेश किये जाने के खिलाफ है. इसके कारण 30 लाख लोग प्रभावित होंगे. यह लोगों के बुनियादी अधिकारों के खिलाफ है. टीएमसी सांसदों ने नाट्य रुपांतरण के माध्यम से अपना विरोध जताया. एक टीएमसी सांसद मोदी का मुखौटा पहने अपने हाथ में डंडा लिए थे और अन्य सांसदों पर सांकेतिक रूप से चला रहे थे.

क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक
बीजेपी ने 2014 के अपने चुनावी वादे के अनुसार नागरिकता संशोधन विधेयक को संसद में पेश करने का एलान किया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फिर से तैयार किए गए नागरिकता संशोधन विधेयक को सोमवार को ही मंजूरी दी थी. यह विधेयक बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के गैर मुस्लिमों को भारत की नागरिकता देने के लिए लाया गया है.

नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन के लिए यह विधेयक लाया जा रहा है. विधेयक में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए अल्पसंख्यक समुदाय के ऐसे लोगों को 12 साल की बजाय भारत में छह वर्ष निवास करने के बाद ही नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है. ऐसे लोगों के पास कोई उचित दस्तावेज नहीं होने पर भी उन्हें नागरिकता दी जा सकेगी. अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग अल्पसंख्यक हैं. यह विधेयक धार्मिक अत्याचार की वजह से भागकर 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश करने वाले हिन्दू, सिख, बौद्ध जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को नागरिकता प्रदान करेगा.