नई दिल्ली: बिजली के अपव्यय को रोकने के लिए हर साल की तरह इस साल भी शनिवार को दुनिया भर में अर्थ आवर डे मनाया गया. 25 मार्च 2018 को अर्थ आवर डे को 11 साल पूरे हो गए. इसके तहत रात 8:30 बजे से लेकर 9:30 तक देश की प्रमुख इमारतों में लाइटें बंद रख बिजली बचाने का संदेश दिया गया. इसे भारत समेत 172 देशों का समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

दिल्ली में संसद परिसर, निर्माण भवन और शास्त्री भवन समेत सरकारी कार्यालयों में विश्व अर्थ आवर मनाते हुए शनिवार रात साढ़े आठ से साढ़े नौ बजे के बीच बत्तियां बंद कर दी गई. अभियान का आयोजन करने वाली संस्था वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, अक्षरधाम मंदिर और हैदराबाद में बुद्ध प्रतिमा तथा कोलकाता में हावड़ा ब्रिज पर लाइट बंद कर दी गई.

पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन ने लोगों से आज अर्थ आवर के दौरान एक घंटे के लिए गैर जरूरी बत्तियां बंद कर देने की अपील की थी. शुक्रवार को उन्होंने कहा था कि वह भी ऐसा करेंगे. नामी गिरामी शख्सियतों और विभिन्न नेताओं ने भी अभियान के लिए अपना समर्थन देने का वादा किया.

क्या है अर्थ ऑवर?
अर्थ ऑवर वर्ल्ड वाइड फंड (WWF) का एक अभियान है. इसका उद्देश्य लोगों को बिजली के महत्व के प्रति और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरुक करना है. इसकी शुरुआत 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर से की गयी थी. इसमें लोगों से 1 घंटे के लिए सारी लाइटें बंद रखने की अपील की गई थी. इस अभियान के महत्व को समझते हुए धीरे धीरे ये और भी देशों में मनाया जाने लगा. इसका मुख्यालय सिंगापुर में है.

भारत में अर्थ आवर
भारत में भी हर साल अर्थ आवर मनाया जाता है. इसमें 1 घंटे के लिए मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया, दिल्ली के इंडिया गेट और कोलकाता के हावड़ा ब्रिज सहित प्रमुख इमारतों की लाइट बंद कर बिजली बचाने का संदेश दिया जाता है. हर साल की तरह इस साल भी कई समाज सेवी संस्थाओं ने भी अपने स्तर पर इसे सफल बनाने के लिए सहयोग किया.