काठमांडू: विश्व की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला माउंट एवरेस्ट पर घंटों रहे ‘ट्रैफिक जाम’ जैसे हालातों के बाद दो भारतीय पर्वतारोहियों की मौत हो गई. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब कुछ दिन पहले ही अभियान के इंस्ट्रक्टरों और नेपाल सरकार ने दावा किया कि दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत पर भीड़भाड़ चिंता का विषय नहीं है.

एवरेस्ट बेस कैंप में लाइजनिंग ऑफिसर ज्ञानेंद्र श्रेष्ठ के हवाले से हिमालयन टाइम्स ने कहा कि 49 वर्षीय भारतीय पर्वतारोही कल्पना दास शिखर पर पहुंचीं, लेकिन गुरुवार दोपहर को बड़ी संख्या में जब पर्वतारोही उतर रहे थे उस समय उनकी मृत्यु हो गई. वह ‘तीन महिला सदस्य अभियान’ की सदस्य थी. दूसरी घटना में शिखर से वापस आते वक्त अपनी यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के 27 वर्षीय भारतीय पर्वतारोही निहाल बगवान की मौत हो गई. पीक प्रमोशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक बाबू शेरपा ने कहा कि बगवान को एक समूह ने बचाया और उन्होंने एवरेस्ट के कैंप 4 में अंतिम सांस ली.

65 वर्षीय ऑस्ट्रियाई पर्वतारोही की मौत
शेरपा ने कहा कि बगवान दो सदस्य अभियान दल का प्रमुख थे. शिखर से लौटते समय बालकनी क्षेत्र के पास बीमार पड़ने पर पर्वतारोही बगवान की कैंप 4 में मृत्यु हो गई. उनकी मौत के लिए मुख्य रूप से आते और जाते समय लगने वाली लंबी कतारों को जिम्मेदार ठहराया गया है, क्योंकि कई लोगों को अपनी बारी आने के लिए 8,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर घंटों इंतजार करना पड़ता है. इस बीच, एक और 65 वर्षीय ऑस्ट्रियाई पर्वतारोही की पहाड़ के उत्तरी तिब्बत इलाके की ओर मौत हो गई.

सप्ताह की शुरुआत में भी हुई थी दो पर्वतारोहियों की मौत
इस सप्ताह की शुरुआत में, 55 वर्षीय भारतीय पर्वतारोही अंजलि कुलकर्णी और 55 वर्षीय अमेरिकी पर्वतारोही डोनाल्ड लिन कैश की पहाड़ पर मृत्यु हो गई थी. महिला अभियान एजेंसी, अरुण ट्रेक्स एंड एक्सपीडिशन ने कहा कि वह ‘थकावट’ की वजह से मारे गए. 8,790 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हिलेरी स्टेप से 15 मीटर नीचे शिखर से उतरते समय एक अमेरिकी पर्वतारोही की मृत्यु हो गई थी. पर्वतारोही अभियान एजेंसी पायनियर एडवेंचर के अध्यक्ष पासंग तेनजे शेरपा ने कहा, “ऊंचाई पर ऊर्जा की कमी के कारण वह बीमारी से मर गया.