
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
कहते हैं जल, जमीन और जंगल हैं, तो पर्यावरण है. पर्यावरण है तो हम सब हैं. लेकिन, कुछ लोग इस बात को जानते हुए भी समझना नहीं चाहते. शायद इसलिए महाराष्ट्र के नासिक में साल 2027 में होने वाले कुंभ मेले की तैयारी के नाम पर 1800 पेड़ों की कटाई का फैसला लिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, तपोवन में साधुग्राम का निर्माण करने के लिए पेड़ काटने के प्रस्ताव है. स्थानीय लोग और पर्यावरणविद् इसके विरोध में खड़े हो गए हैं. मामला बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है. फिलहाल अदालत ने इन पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है.
भारत में पेड़ों की कटाई सिर्फ पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि कानूनी और सामाजिक ज़िम्मेदारी से जुड़ा मामला है. शायद इसलिए हाल के समय में पेड़ों की कटाई के मामलों में कभी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और कभी अदालतों को दखल देना पड़ा है. आइए जानते हैं देश में पेड़ काटने से जुड़े क्या कानून हैं? अलग-अलग राज्यों के नियम क्या हैं? अगर आपने नियमों के खिलाफ जाकर पेड़ काटा, तो कितनी सजा हो सकती है? कितना जुर्माना भरना पड़ सकता है?
पेड़ काटने को लेकर क्या है कानून?
भारत में वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 (Forest Conservation Act, 1980) के तहत आरक्षित वन, संरक्षित वन या सरकारी भूमि पर स्थित वनों को गैर-वानिकी उपयोग के लिए बदलने, बड़े पैमाने पर पेड़ काटने या भूमि बदलने के लिए केंद्र सरकार (पर्यावरण मंत्रालय) की मंजूरी लेना जरूरी है.
वहीं, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत बड़े प्रोजेक्ट जैसे हाईवे, डैम, इंडस्ट्रियल एरिया (जिसमें पेड़ों को काटने की जरूरत है) के लिए पर्यावरणीय मंजूरी लेना जरूरी है. लगभग हर राज्य ने अपने यहां ट्री प्रिज़र्वेशन एक्ट/ अर्बन ट्री एक्ट/ लोकल ट्री एक्ट बनाए हैं, जिनके तहत शहरों और ग्राम पंचायत सीमा में पेड़ काटने के लिए अनुमति लेना अनिवार्य है.
पेड़ काटने को लेकर अलग-अलग राज्यों में क्या है कानून?
दिल्ली-NCR: दिल्ली प्रिज़र्वेशन ऑफ ट्रीज़ एक्ट, 1994 के तहत सड़कों, पार्कों, सरकारी दफ्तरों, हाउसिंग सोसाइटी आदि में पेड़ काटने से पहले ट्री ऑफिसर की अनुमति अनिवार्य है. पेड़ काटने की अनुमति मिलने पर भी आमतौर पर 510 नए पौधे लगाना और उनका रखरखाव सुनिश्चित करना पड़ता है.
उत्तर प्रदेश: यूपी वृक्ष संरक्षण अधिनियम /नगर निगम व विकास प्राधिकरण के नियम के तहत शहरों और नोटिफ़ाइड क्षेत्रों में पेड़ काटने से पहले स्थानीय प्राधिकरण से अनुमति जरूरी है. घर के भीतर भी पुराने और बड़े पेड़ काटने पर अक्सर अनुमति प्रक्रिया लागू होती है.
महाराष्ट्र: महाराष्ट्र (अर्बन एरिया) प्रिज़र्वेशन ऑफ ट्रीज़ एक्ट, 1975 के तहत हर नगर निगम में ट्री अथॉरिटी गठित की जाती है. कोई भी व्यक्ति एक से अधिक पेड़ काटना चाहता है, तो आवेदन, निरीक्षण और अनुमोदन के बाद ही अनुमति दी जाती है.
अन्य राज्यों के नियम: कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल समेत बाकी राज्यों में अपने-अपने ट्री प्रिज़र्वेशन या अर्बन ट्री एक्ट हैं, जहां शहर सीमा में पेड़ काटने पर नगर निगम या ग्राम पंचायत से अनुमति जरूरी है.
कॉफी, रबर, चाय आदि के बागान जैसे विशेष कृषि फसलों पर कुछ अलग प्रावधान हो सकते हैं, लेकिन प्राकृतिक और सड़क किनारे पेड़ों के लिए कठोर नियम लागू रहते हैं.
पेड़ काटने पर कैसे होती है भरपाई?
पेड़ काटने की भरपाई सिर्फ आर्थिक नहीं, पर्यावरणीय भी होती है. जब किसी सरकारी या प्राइवेट प्रोजेक्ट के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाते हैं, तो प्रोजेक्ट प्रोपोज़र को दूसरी भूमि पर दोगुना या उससे ज़्यादा क्षेत्रफल में पेड़ लगवाने की बाध्यता होती है. इसकी लागत Compensatory Afforestation Fund में जमा कराई जाती है. कई राज्यों में एक पेड़ काटने पर 5, 10 या 20 पेड़ लगाने की शर्त लगाई जाती है.
नियम नहीं मानने पर कितनी सज़ा?
पेड़ काटने के नियमों की अनदेखी को कई बार संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है. राज्य कानूनों के तहत 3 महीने से लेकर 1 साल या उससे अधिक की जेल का प्रावधान है. वन अधिनियम के तहत आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध कटाई पर यह सज़ा 3 से 7 साल तक हो सकती है.
कितना देना होगा जुर्माना?
पेड़ को उसकी प्रजाति, आयु, पर्यावरणीय मूल्य, लकड़ी के बाज़ार मूल्य के आधार पर मूल्यांकित किया जाता है. अवैध कटाई की स्थिति में प्रति पेड़ हज़ारों से लेकर लाखों रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. जंगल में अवैध कटाई होने पर लकड़ी, वाहन, औज़ार जब्त करने तक के प्रावधान हैं.
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