कोलकाता: अपनी भाषा को मान्यता देने की मांग को लेकर ‘रेल रोको’ प्रदर्शन कर रहे आदिवासियों के एक प्रमुख संगठन ने सोमवार देर रात के बाद अपना प्रदर्शन खत्म कर दिया. बंगाल के पश्चिमी हिस्सों में यह प्रदर्शन करीब 22 घंटों तक चला, जिसके कारण हजारों यात्री फंसे हुए थे. रेलवे के एक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी. Also Read - TMC की खूबसूरत सांसद नुसरत जहां ने फिर किया कमाल, ढाक पर लगाई थाप, देखें VIDEO

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आदिवासी भाषा को मान्यता देने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्र के कुछ राजमार्गों को भी जाम कर दिया था जिससे आम लोगों की समस्या और ज्यादा बढ़ गई थीं. प्रवक्ता ने कहा कि भारत जकत माझी मड़वा के सदस्यों ने कल देर रात के बाद 2:16 बजे और 3:40 बजे के बीच नेकुसिनी, खेमासुली, बालीचक और सालबोनी स्टेशनों पर ‘रेल रोको’ प्रदर्शन खत्म किया. यह प्रदर्शन सोमवार को सुबह छह बजे शुरू हुआ था. दक्षिण-पूर्वी रेलवे के प्रवक्ता संजय घोष ने बताया कि प्रदर्शन खत्म होने के बाद ट्रेनों की आवाजाही शुरू हुई. Also Read - संसद में भोजन परोसने की 52 साल पुरानी परंपरा का अंत, अब रेलवे नहीं चलाएगी कैंटीन, जानिए क्यों

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कई एक्सप्रेस ट्रेनें प्रदर्शन के चलते थीं रद्द

प्रदर्शन के कारण हजारों यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था, क्योंकि देश के दक्षिणी, पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों की कई ट्रेनें दक्षिण-पूर्व रेलवे के प्रभावित खड़गपुर मंडल से आती-जाती हैं ताकि हावड़ा और ओड़िशा के कुछ हिस्सों में पहुंच सकें. मुंबई, चेन्नई, नागपुर और अहमदाबाद से हावड़ा को जोड़ने वाली ट्रेनों सहित कई एक्सप्रेस ट्रेनें इस प्रदर्शन के कारण सोमवार को रद्द कर दी गई थीं या अपने निर्धारित गंतव्य से पहले ही उन्हें अपनी यात्रा संपन्न करनी पड़ी थी. घोष ने कहा कि प्रदर्शन के कारण खड़गपुर-टाटानगर, खड़गपुर-भद्रक, खड़गपुर-हावड़ा और खड़गपुर-आद्रा रेल खंडों पर ट्रेनों की आवाजाही रोकनी पड़ी थी.  (इनपुट एजेंसी)