नई दिल्ली: भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका उन देशों की सूची में शामिल हैं जहां मुस्लिमों में एक बार में तीन तलाक की कुप्रथा पर प्रतिबंध लगा हुआ है. भारत और 22 अन्य देशों में इस कुप्रथा पर पाबंदी लगी हुई है.

पाकिस्तान और बांग्लादेश में, अगर कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को तलाक देना चाहता है तो उसे इस संबंध में ‘पंचाट परिषद’ को एक लिखित नोटिस देना होता है और इसकी एक प्रति अपनी पत्नी को देनी होती है. ‘जियो न्यूज’ के अनुसार, पाकिस्तान में वर्ष 1961 में मुस्लिम परिवार विधि अध्यादेश लागू होने के साथ तीन तलाक पर पाबंदी लगा दी गई थी.

अफगानिस्तान में एक बार में तीन तलाक की परंपरा को गैरकानूनी माना जाता है. पाकिस्तानी शिक्षाविद मोहम्मद मुनीर की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका के निकाह एवं तलाक (मुस्लिम) अधिनियम, 1951 में 2006 में संशोधन के बाद तीन तलाक पर पाबंदी लगा दी गई थी.

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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल मुस्लिम समुदाय में एक बार में तीन तलाक या ‘तलाक ए बिद्दत’ की परंपरा को ‘असंवैधानिक’ बताते हुए इस पर प्रतिबंध लगाया था. इसके अलावा, तुर्की, साइप्रस, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, मलेशिया, जार्डन, मिस्र, ईरान, इराक, ब्रूनेई, यूएई, इंडोनेशिया, लीबिया, सूडान, लेबनान, सऊदी अरब, मोरक्को और कुवैत में भी तीन तलाक पर पाबंदी है.

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दरअसल, केन्द्रीय कैबिनेट ने बुधवार को एक अध्यादेश को मंजूरी देकर तीन तलाक की परंपरा पर पाबंदी लगाते हुए इसे दंडनीय अपराध बनाया है. कानून मंत्रालय के सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी. ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक’ को लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी है लेकिन यह राज्यसभा में लंबित है. वहां पर सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है. उच्चतम न्यायालय ने पिछले वर्ष इस प्रथा पर रोक लगा दी थी. यह प्रथा अब भी जारी है इसलिए इसे दंडनीय अपराध बनाने की खातिर विधेयक लाया गया है.