नई दिल्ली| तीन तलाक को फौजदारी अपराध घोषित करने के प्रावधान वाले विधेयक पर बुधवार को राज्यसभा में भारी हंगामा हुआ और विपक्ष जहां इसे प्रवर समिति में भेजे जाने की मांग पर अड़ा रहा वहीं सरकार ने कांग्रेस पर इसकी राह में रोड़ा लगाने का आरोप लगाते हुए इसे जल्दी पारित कराने पर बल दिया. दोनों पक्षों के अपने अपने रूख पर अड़े रहने के कारण विधेयक के बारे में कोई फैसला नहीं हो सका और उपसभापति पी जे कुरियन ने अपराह्न तीन बजकर करीब 55 मिनट पर बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी. आज बिल को फिर सदन में पेश किया जाएगा जिस पर बहस होगी.
तीन तलाक: राज्यसभा में बिल को लेकर रोड़ा अटका सकती है कांग्रेस

तीन तलाक: राज्यसभा में बिल को लेकर रोड़ा अटका सकती है कांग्रेस

सरकार एक बार फिर इस बिल को राज्यसभा में पेश करेगी. मगर सरकार को बिल पास कराने में कामयाबी मिले इसके आसार कम ही हैं. विपक्ष तो इस बिल का विरोध कर ही रहा है, एनडीए के सहयोगी दल भी बीजेपी के साथ नजर नहीं आ रहे हैं. विपक्ष के साथ-साथ सहयोगी दल भी चाहते हैं कि इस बिल में तमाम खामियां हैं और उसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए. इनमें से एआईएडीएमके ने लोकसभा में भी सरकार को बिल पर समर्थन नहीं दिया था. एआईएडीएमके कई मुद्दों पर संसद में सरकार के साथ खड़ी नजर आई है.
शिवसेना और टीडीपी भी साथ नहीं
एक ओर राज्यसभा में इस विधेयक को सेलेक्ट कमेटी को भेजने के लिए पूरा विपक्ष एकजुट नजर आ रहा है तो वहीं, शिवसेना और टीडीपी भी इस बिल में संशोधन चाहती हैं. AIADMK भी इस बिल को लेकर सरकार के साथ नहीं है.  टीडीपी के पास 6, शिवसेना के पास 3 और एआईएडीएमके के पास 13 सांसद हैं.
राज्यसभा के आंकड़े:
बता दें 245 सदस्यीय राज्यसभा में निर्दलीय और मनोनीत सदस्यों को छोड़कर 28 राजनीतिक पार्टियां हैं. इसमें बीजेपी और कांग्रेस के पास 57-57 सांसद हैं. बीजेपी के सांसदों को मिलाकर एनडीए में कुल 88 सांसद हैं. सभी सहयोगी दलों का साथ मिल भी जाता है, तो भी बिल को पारित कराने के लिए बीजेपी को कम से कम 35 और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी.
किस पार्टी के हैं कितने सांसद 
राज्यसभा में बीजेपी और कांग्रेस के पास 57-57 सीटें हैं. समाजवादी पार्टी के 18, तृणमूल कांग्रेस के 12, बीजू जनता दल के 8, जेडीयू के 7, एआईएडीएमके के 13, कम्युनिस्ट पार्टी के पास 7, टीडीपी के पास 6, बीएसपी के पास 5, एनसीपी के पास 5, डीएमके के पास 4, आरजेडी के पास 3, अकाली दल के पास 3 और शिवसेना के पास 3 सांसद हैं.