नई दिल्ली: राज्यसभा में तीन तलाक बिल पारित होने के बाद कांग्रेस ने कहा कि एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को आपराधिक कृत्य बनाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि इस प्रथा को उच्चतम न्यायालय ‘‘शून्य एवं अमान्य’’ करार दे चुका है. बता दें कि कांग्रेस पहले भी कहती रही है कि तीन साल की सजा अगर पति को हुई तो फिर पत्नी का गुजारा कैसे होगा. उसके बच्चों का क्या होगा. पालन पोषण कौन करेगा. कांग्रेस का कहना है कि पारिवारिक मामले को आपराधिक कोर्ट में ले जाने वाला ये क़ानून एक ऐतिहासिक गलती है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘‘हमने बुनियादी तौर पर इस विधेयक का समर्थन किया था. हम इसमें संशोधन चाहते थे ताकि मुस्लिम महिलाओं को सहयोग मिल सके. हमारा विरोध दो-तीन मुद्दों पर था.’’ उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने तीन तलाक को ‘‘शून्य एवं अमान्य’ कर दिया है, ऐसे में इसे फौजदारी का मामला बनाने की क्या जरूरत है. वहीं, कांग्रेस नेता राजबब्बर ने इसे बड़ी गलती बताया है. राजबब्बर ने कहा कि ‘मैं समझता हूं कि इस देश के अंदर किसी भी फैमिली लॉ को लेकर एक बहुत बड़ा झटका है. जिन मामलों को पारिवारिक अदालतों में होना चाहिए, वो अब आपराधिक अदालतों में होंगे. ये एक ऐतिहासिक गलती है.’

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वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रवि शंकर प्रसाद सहित बीजेपी सरकार के अन्य नेताओं ने तीन तलाक बिल पास होने को भारतीय लोकतंत्र को ऐतिहासिक करार दिया है. बीजेपी और केंद्र सरकार ने इसे मुस्लिम महिलाओं के आज़ादी का दिन बताया है. गौरतलब है कि संसद ने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक देने की प्रथा पर रोक लगाने के प्रावधान वाले एक ऐतिहासिक विधेयक को मंजूरी दे दी गई है. विधेयक में तीन तलाक का अपराध सिद्ध होने पर संबंधित पति को तीन साल तक की जेल का प्रावधान किया गया है. मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को राज्यसभा ने 84 के मुकाबले 99 मतों से पारित कर दिया. लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है.