नई दिल्ली। सरकार ने आज ट्रिपल तलाक बिल को राज्यसभा में पेश कर दिया. इसके साथ ही सदन में इसे लेकर बहस का दौर शुरू हो गया. सरकार और विपक्ष दोनों तरफ से इसे लेकर तर्क रखे गए. कांग्रेस सहित कई दलों ने इसे सिलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग की. कांग्रेस का कहना है कि इसमें तलाक देने वाले को 3  साल की जेल वाला प्रावधान हटाया जाए.

तीन तलाक को फौजदारी अपराध घोषित करने के प्रावधान वाले विधेयक पर आज राज्यसभा में भारी हंगामा हुआ और विपक्ष जहां इसे प्रवर समिति में भेजे जाने की मांग पर अड़ा रहा वहीं सरकार ने कांग्रेस पर इसकी राह में रोड़ा लगाने का आरोप लगाते हुए इसे जल्दी पारित कराने पर बल दिया.  दोनों पक्षों के अपने अपने रूख पर अड़े रहने के कारण विधेयक के बारे में कोई फैसला नहीं हो सका और उपसभापति पी जे कुरियन ने अपराह्न तीन बजकर करीब 55 मिनट पर बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी.

विपक्ष विधेयक को प्रवर समिति में भेजने के प्रस्ताव पर मत विभाजन की मांग पर अड़ा रहा. वित्त मंत्री अरूण जेटली और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए इस विधेयक को जल्दी पारित कराने की जरूरत पर बल दिया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और लोकसभा में इस विधेयक के पारित होने के बाद भी ऐसी घटनाएं समाज में हो रही हैं.

कांग्रेस की ओर इशारा करते हुए सरकार ने आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझ कर विधेयक को अवरूद्ध करने की कोशिश कर रहा है. प्रसाद ने कहा कि सरकार ने लोकसभा में इस विधेयक का समर्थन किया है और यहां दोहरा मापदंड अपना रही है. हालांकि नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने सत्तापक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि हम विधेयक की प्रक्रिया को पूरा करेंगे.

कानून मंत्री प्रसाद ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2017 चर्चा के लिए पेश किया और इसे ऐतिहासिक विधेयक बताया.
इसके बाद तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर राय और कांग्रेस के आनंद शर्मा ने विधेयक को सदन की प्रवर समिति के पास भेजने का प्रस्ताव पेश किया. उन्होंने दावा किया कि विधेयक त्रुटिपूर्ण है और प्रवर समिति में इस विधेयक पर व्यापक चर्चा होगी. नेता प्रतिपक्ष आजाद ने भी इसे प्रवर समिति में भेजने पर बल दिया और भाजपा पर राजनीति करने का आरोप लगाया.

जेटली ने विभिन्न नियमों और सदन की परिपाटी का हवाला देते हुए कहा कि दोनों प्रस्ताव निर्धारित प्रक्रिया को पूरी नहीं करते और दोनों प्रस्ताव अस्वीकार्य हैं. उन्होंने आनंद शर्मा के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा कभी नहीं होता कि संसद की किसी समिति में सत्तारूढ़ दल को बाहर कर दिया जाए. विधेयक को जल्दी पारित कराने का कारण बताते हुए जेटली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर रोक के लिए कानून की खातिर छह महीने का समय दिया है जो फरवरी में पूरा हो जाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसे में संसद से उम्मीद की जाती है कि वह जल्दी से विधेयक पारित करे.

इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक हुयी तथा दोनों पक्षों ने अपने अपने पक्ष में विभिन्न तर्क दिए. तृणमूल के डेरेक ओ ब्रायन और सपा के नरेश अग्रवाल ने भी विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग की. भाजपा सदस्यों के विरोध के बीच कांग्रेस के कपिल सिब्बल ने कुछ कहने का प्रयास किया. लेकिन उनकी बातें ठीक से सुनी नहीं जा सकी. इस दौरान कानून मंत्री प्रसाद ने उनके बोलने पर आपत्ति जतायी और कहा कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक पक्ष के वकील रहे हैं, इसलिए वह इस मुद्दे पर नहीं बोल सकते. सदन में हंगामा थमते नहीं देख कुरियन ने बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी.

किसने क्या कहा, पढ़ें- 

अरुण जेटली: सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मियाद फरवरी में खत्म हो रही है. 22 फरवरी को 6 महीने की मियाद खत्म हो रही है. तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध माना है. बिल की कॉपी पहले ही सांसदों को बांटी जा चुकी है. कोई भी संशोधन 24 घंटे पहले पेश किया जाना चाहिए. बिल सिलेक्ट कमेटी को भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं. पूरे देश ने देखा कि आपने (कांग्रेस) लोकसभा में इसका समर्थन किया और राज्यसभा में बिल का विरोध कर रहे हैं.

रविशंकर प्रसाद, कानून मंत्री- बिल लोकसभा में पास होने के बाद भी तीन तलाक जारी है. क्या कांग्रेस महिलाओं के खिलाफ है.

आनंद शर्मा, कांग्रेस नेता-  बिल को सिलेक्ट कमेटी को भेजने के बाद बजट सत्र में इस पर कमेटी अपनी रिपोर्ट पेश कर दे. संसद एक रबर स्टैंप की तरह काम नहीं करती. सिलेक्ट कमेटी बिल में जरूरी सुधार करेगी.

नरेश अग्रवाल, सपा सांसद– एक सदन गलती करे तो दूसरा सदन उसको सुधारता है.

गुलाम नबी आजाद, कांग्रेस सांसद- लोकतंत्र में बहुमत का महत्व है, राज्यसभा में हमारा बहुमत है. राज्यसभा में बहुमत नहीं तो डिविजन करने का फैसला लीजिए.

कांग्रेस से सरकार का अनुरोध

सरकार ने कांग्रेस से अनुरोध किया था कि मुस्लिम महिलाओं को एक बार में तीन तलाक कहे जाने के चलन को फौजदारी अपराध बनाने के प्रावधान वाला विधेयक जब राज्यसभा में आए तो वह किसी संशोधन पर जोर न दे. लोकसभा मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है. कांग्रेस ने इस विधेयक के कुछ प्रावधानों पर लोकसभा में संशोधन पेश किया था किन्तु उन्हें पारित करवाने पर उसने बल नहीं दिया.

संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि सरकार चाहेगी कि कांग्रेस संशोधन पर बल नहीं देने के अपने उसी रूख पर कायम रहे जो उसने लोकसभा में अपनाया था. उन्होंने कहा कि हमारी कांग्रेस सहित विपक्षी दलों से निरंतर बातचीत चल रही है। हमने कांग्रेस से कहा है कि चूंकि उन्होंने लोकसभा में किसी संशोधन पर बल नहीं दिया है, उन्हें राज्यसभा में भी यही करना चाहिए.

कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य रेणुका चौधरी ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण के पक्ष में रही है किन्तु पार्टी को यह देखना होगा कि विधेयक में वास्तव में क्या है.