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  • 1:25 PM IST

    सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक को गैर कानूनी कहा है: रविशंकर प्रसाद

  • 1:01 PM IST

    ये बिल महिलाओं के अधिकार और न्याय के लिए है. इसका किसी प्रार्थना, परंपरा या धर्म से संबंध नहीं हैः कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद

  • 1:00 PM IST

    कांग्रेस, आरजेडी, बीजेडी और असदुद्दीन ओवैसी ने किया बिल का विरोध.

  • 12:46 PM IST

    यह बिल त्रुटिपूर्ण है, विधेयक में कई आंतरिक विरोधाभास हैं: बीजेडी सांसद भारतरुहाड़ी महताब

  • 12:39 PM IST

    बिल पास हुआ तो मुस्लिम महिलाओं से अन्याय होगाः ओवैसी

  • 12:38 PM IST

    घरेलू हिंसा कानून पहले से है तो नया बिल क्यों? : ओवैसी

  • 12:36 PM IST

    यह विधेयक मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और इसमें कानूनी जुड़ाव का अभाव हैः असदुद्दीन ओवैसी

  • 10:59 AM IST

    ट्रिपल तलाक बिल पर सरकार को मिलेगा कांग्रेस का साथ.

  • 10:58 AM IST

    मुझे नहीं लगता है कि हमें इस बिल का समर्थन करना चाहिए क्योंकि उन्होंने (सरकार ने) हमें समझाया नहीं है कि कैसे ट्रिपल तलाक का अपराध महिलाओं को फायदा पहुंचाएगा. अगर ट्रिपल तलाक पर किसी को जेल में बंद कर दिया जाता है, तो उसके परिवार का ख्याल कौन रखेगाः सलमान खुर्शीद, कांग्रेस

नई दिल्ली. तीन तलाक को प्रतिबंधित करने और विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकार सुरक्षित करने से संबंधित ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2017 को सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में पेश कर दिया. विधेयक पर सदन में गुरुवार को ही चर्चा भी होगी. 

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केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह कानून ऐतिहासिक है और उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘तलाक ए बिदत’ को गैरकानून घोषित किये जाने के बाद मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए इस सदन द्वारा इस संबंध में विधेयक पारित करना जरूरी हो गया है. Also Read - नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने संसद भंग की, आपात बैठक के बाद बड़ा फैसला

उन्होंने इस संबंध में कुछ सदस्यों की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि यह कानून किसी मजहब से जुड़ा नहीं बल्कि नारी सम्मान से जुड़ा है. इससे पहले विधेयक पेश किये जाने का विरोध करते हुए एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि यह विधेयक संविधान की अवहेलना करता है और कानूनी रूपरेखा में उचित नहीं बैठता. Also Read - Parliament Session News: संसद का शीतकालीन सत्र नहीं होगा, सरकार जनवरी में बुला सकती है बजट सत्र

उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय के मामलों से निपटने के लिए घरेलू हिंसा कानून और आईपीसी के तहत अन्य पर्याप्त प्रावधान हैं और इस तरह के नये कानून की जरूरत नहीं है. ओवैसी ने कहा कि यह विधेयक पारित होने और कानून बनने के बाद मुस्लिम महिलाओं को छोड़ने की घटनाएं और अधिक बढ़ जाएंगी. 

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राजद के जयप्रकाश नारायण यादव ने भी विधेयक को गैरजरूरी बताते हुए कहा कि इसमें दोषी को तीन साल की सजा का प्रावधान सही नहीं है. बीजद के भर्तृहरि महताब ने विधेयक को पेश करने के तरीके पर सवाल खड़ा किया और कहा कि इसका मसौदा बनाने में खामियां हैं.

उन्होंने कहा कि इस विधेयक में तीन तलाक के संबंध में उच्चतम न्यायालय का दिया हुआ फैसला नहीं झलकता और सरकार को इसे वापस लेकर पुनर्विचार करना चाहिए. आईयूएमएल के ईटी मोहम्मद बशीर और अन्नाद्रमुक के ए अनवर राजा ने भी विधेयक को गैरजरूरी बताते हुए कहा कि यह विवाहित मुस्लिम महिलाओं के साथ न्याय करने के बजाय उनके साथ अन्याय को बढ़ाएगा. 

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इन सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए कानून मंत्री प्रसाद ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक दिन है जो इस सदन में मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए विधेयक पेश किया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘यह कानून किसी पूजा, इबादत या मजहब से जुड़ा नहीं होगा बल्कि नारी सम्मान और गरिमा के लिए है.’

 प्रसाद ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने ‘तलाक ए बिदत’ को गैरकानूनी करार दिया जिसके बाद अगर मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय की घटनाएं हो रहीं हैं तो क्या यह सदन खामोश रहेगा? उन्होंने कहा कि कुछ सदस्य बुनियादी अधिकारों और अधिकारों की समानता की बात कर रहे हैं तो क्या इस सदन को तीन तलाक की पीड़िताओं के साथ हो रहे अन्याय को नहीं देखना होगा. 
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प्रसाद ने विधेयक को संविधान के बुनियादी ढांचे के खिलाफ होने संबंधी कुछ सदस्यों की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत यह विधेयक पूरी तरह संविधान के बुनियादी ढांचे के तहत है और इस सदन को विवाहित मुस्लिम महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय को खत्म करने के लिए कानून लाने का पूरा अधिकार है.

बाद में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि कानून मंत्री प्रसाद ने उनसे विशेष मामले के तौर पर उक्त विधेयक पर आज ही सदन में चर्चा कराके इसे पारित कराने का आग्रह किया है और दोपहर दो बजे इस पर चर्चा शुरू होगी. हालांकि कुछ सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई.