नई दिल्ली। तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को फैसला सुना सकता है. जानकारी के मुताबिक, इस मामले में पांच जजों की संवैधानिक बेंच मंगलवार 22 अगस्त को सुबह साढ़े दस बजे फैसला सुनाएगा. इस मामले पर कोर्ट में 11 से 18 मई तक सुनवाई चली थी. सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था.

संवैधानिक बेंच ने तीन तलाक की परंपरा को चुनौती देने वाली मुस्लिम महिलाओं की अलग अलग पांच याचिकाओं सहित सात याचिकाओं पर सुनवाई की थी. याचिकाकर्ताओं का दावा था कि तीन तलाक की परंपरा असंवैधानिक है.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जगदीश सिंह खेहर के नेतृत्व वाली पांच जजों की संवैधानिक बेंच में जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस उदय उमेश ललित और जस्टिस एस.अब्दुल नजीर शामिल हैं.

तीन तलाक की प्रथा को वैध नहीं मानती केंद्र सरकार

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में कहा था कि वह तीन तलाक को जारी रखने के पक्ष में नहीं है क्योंकि सरकार इस प्रथा को वैध नहीं मानती. अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने 18 मई को सुनवाई के दौरान तीन तलाक को ‘दुखदायी’ प्रथा करार दिया था और न्यायालय से अनुरोध किया कि वह इस मामले में ‘मौलिक अधिकारों के अभिभावक के रूप में कदम उठाए.

18 मई को ही सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने कहा था कि उसने फैसला किया है कि वह काजियों के लिए एक दिशा-निर्देश जारी करेगा, जिसमें वे मुस्लिम महिलाओं द्वारा निकाह के लिए अपनी मंजूरी प्रदान करने से पहले उन्हें तीन तलाक प्रथा से बाहर निकलने का विकल्प प्रदान करेंगे.

एआईएमपीएलबी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि 17 मई को उनकी बोर्ड के सदस्यों के साथ हुई एक बैठक में उन्होंने देश भर के काजियों को एक दिशा-निर्देश जारी करने का फैसला लिया. उन्होंने कहा कि वधू द्वारा तीन तलाक से बाहर निकलने के चुनाव को निकाहनामे में शामिल किया जाएगा.

केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक के मुद्दे को संवैधानिक नैतिकता से जोड़े जाने पर एआईएमपीएलबी ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार संविधान के अनुच्छेद 25(2)(बी) के माध्यम से तीन तलाक को खत्म करने के लिए कानून बनाने से क्यों भाग रही है. संविधान के अनुच्छेद 25(2)(बी) के मुताबिक, समाज कल्याण या सुधार के लिए सरकार को कानून बनाने से कोई नहीं रोक सकता. अनुच्छेद 25 प्रत्येक व्यक्ति को अंत:करण की स्वतंत्रता और धर्म के अबाध रूप में मानने, आचरण करने तथा प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है.

मोदी ने की तीन तलाक के खिलाफ महिलाओं की लड़ाई की सराहना 

पीएम नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त को अपने भाषण के दौरान तीन तलाक की प्रथा के खिलाफ लड़ाई लड़ रही महिलाओं की सराहना की और कहा कि पूरा देश उन्हें यह अधिकार दिलाने के इस प्रयास में उनके साथ है. मोदी ने लालकिले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा था कि मैं उन महिलाओं के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करता हूं जिन्हें तीन तलाक के कारण दुखद जीवन जीना पड़ रहा है. उन महिलाओं ने इसके इसके खिलाफ एक आंदोलन चलाया जिसने इस प्रथा के खिलाफ पूरे देश में एक माहौल तैयार कर दिया. प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनके अधिकार दिलाने के लिए पूरा देश इन प्रयासों में उनके साथ है.

आईएएनएस इनपुट