नई दिल्ली: त्रिपुरा में बिप्लव देब की नेतृत्व वाली बीजेपी और आईपीएफटी की सरकार एक बार फिर चर्चा में है. राज्य सरकार ने नौकरशाहों के पहनावे को लेकर नया फरमान जारी किया है. सीपीएम और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने राज्य सरकार के इस तुगलकी फरमान को लेकर कड़ी आलोचना की है और इसे सरकार की सामंती मानसिकता बताया है. त्रिपुरा सरकार के मुख्य सचिव सुशील कुमार (शिक्षा, राजस्व और सूचना एवं सांस्कृतिक मामले) की ओर से 20 अगस्त को एक ज्ञापन जारी किया गया. इसमें कहा गया है कि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री चीफ सेक्रेटरी के साथ होने वाली मीटिंग में जींस, कार्गो पैंट और डेनिम शर्ट और काला चश्मा पहनने से बचें. राज्य सरकार की ओर से जारी ज्ञापन में कहा गया है कि ड्रेस कोड का सख्ती से पालन करें. Also Read - PM मोदी ने नए साल पर गरीबों को सस्‍ते मकानों का द‍िया ग‍िफ्ट, बोले- ये 6 प्रोजेक्ट वाकई लाइट हाउस की तरह हैं

मुख्य सचिव सुशील कुमार की ओर से 20 अगस्त को जारी ज्ञापन में कहा गया है कि जिला मजिस्ट्रेट, जिला प्रमुख होने के नाते एडीएम को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि राज्य स्तर की आधिकारिक बैठक में जिनकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्री, मुख्य सचिव इत्यादि करते हों उन बैठकों में अधिकारी ड्रेस कोड का पालन करें. Also Read - UP: 104 पूर्व नौकरशाहों ने सीएम योगी को लिखा खत, कहा- नफरत, विभाजन और राजनीति का केंद्र बन गया है प्रदेश

कुमार ने ज्ञापन में लिखा है कि उनके पास भारत सरकार में तीन दशकों तक काम करने का अनुभव है और अभी तक आईएएस या केंद्रीय सेवाओं के अधिकारी को कैजुअल ड्रेस पहने हुए कार्यालय में नहीं देखा गया. ज्ञापन ने यह भी कहा गया है कि कुछ अधिकारी बैठक के दौरान अपने मोबाइल फोन पर मैसेज पढ़ते और भेजते देखे गए हैं. यह अपमान का प्रतीक है. Also Read - One Nation, One Ration Card: देश के कई राज्यों ने लागू की 'वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना', देखिए पूरी लिस्ट और उठाइए इसका लाभ

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार के कार्यकाल में भी अफसरों को जेब से हाथ बाहर रखने के निर्देश थे. त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष, तापस डे ने कहा कि ये आदेश सरकार की ‘सामंती मानसिकता’ को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि यह एक सामंती मानसिकता है. सरकार ने बुनियादी समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया है. ये सब मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए है. वहीं सीपीएम के प्रवक्ता गौतम दास ने ज्ञापन की आलोचना करते हुए कहा कि यह अंग्रेजों के अधीन औपनिवेशिक शासन की याद दिलाता है. हम एक लोकतांत्रिक देश हैं. यह अब औपनिवेशिक शासन नहीं है. वे किसी के पहनावे को लेकर कैसे आदेश दे सकते हैं.