अगरतला: त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत के बाद राज्य से तोड़फोड़ और मारपीट के बाद अब वामपंथी स्मारकों को तोड़ने की खबर आ सामने आ रही है. त्रिपुरा के बेलोनिया में मशहूर कम्यूनिस्ट विचारक लेनिन की मूर्ति को गिरा दिया गया. इस मूर्ति को सोमवार को गिराने का मामला सामने आया है. त्रिपुरा में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर आरोप लग रहे हैं कि जीत के नशे में चूर होकर वो तोड़फोड़ पर उतर आए हैं और उन्होंने ही ये मूर्ति गिरा दी. बताया जा रहा है कि उस दौरान समर्थकों ने भारत माता के नारे भी लगाएं. वहीं पुलिस का इस मामले में कहना है कि बीजेपी समर्थकों ने बुलडोज़र ड्राइवर को शराब पिलाकर इस घटना को अंजाम दिया है. फिलहाल पुलिस ने बुलडोजर को सील करते हुए उसके ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस मामले की जांच में लगी हुई है. साम्यवादी विचारधारा के नायक लेनिन की मूर्ति तोड़े जाने के बाद से वामपंथी दल और उनके कैडर नाराज हैं. Also Read - UP Vidhan Parishad Election: यूपी विधान परिषद की 11 सीटों के लिए हुए चुनाव में 55.47% मतदान

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इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए माकपा ने ट्वीट किया है कि त्रिपुरा में चुनाव जीतने के बाद होने वाली हिंसाओं की घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने वाले लोकतंत्र पर भरोसे के दावों को मजाक है. इसके साथ ही सीपीएम ने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के बाद बीजेपी-आइपीएफटी कार्यकर्ता हिंसा पर उतारू हो चुके हैं.

हालांकि भाजपा ने हिंसा के इन आरोपों को खारिज कर दिया है.  पार्टी नेता नलिन कोहली ने कहा कि भाजपा हिंसा की संस्कृति में  विश्वास नहीं करती. त्रिपुरा जैसी जगहों पर वाम दल 11 भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या पर चुप्पी साधे रहे. वाम दलों का समर्थन करने वाले कुछ लोग इस तरह की चर्चा को हवा दे रहे हैं.

व्लादिमीर लेनिन

रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन ने रूस में साम्यवादी विचारधारा का प्रचार शुरू किया था. इस वजह से उस दौरान लेनीन को कई बार जेल भेजा गया था और निर्वासित भी किया गया. ‘प्रलिटरि’ एवं ‘इस्क्रा’ के संपादन के अतिरिक्त 1898 में उन्होंने बोल्शेविक पार्टी की स्थापना की. 1905 की क्रांती के उनके प्रयास असफल रहे, लेकिन 1917 में उन्होंने रूस के पुननिर्माण योजना बनाई और सफल हुए. उन्होंने केरेन्सकी की सरकार पलट दी और 7 नवम्बर, 1917 को लेनीन की अध्यक्षता में सोवियत रूस में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार बनी. लेनिन की कम्युनिस्ट सिद्धांत और कार्यनीति लेनिनवाद के नाम से जानी जाती है. आज के वामपंथ विचारधारा और कार्यशैली में इनके सिद्धांतों का अहम योगदान है.

राज्य में कई स्थानों पर भड़की हिंसा

बीबीसी एक रिपोर्ट के मुताबिक विधानसभा के चुनावों के परिणामों के बाद प्रदेश के विभिन्न इलाकों से हिंसा की खबरें मिल रही हैं. खासतौर पर राजधानी अगरतला के पास बांग्लादेश की सीमा से लगे इलाकों से. पश्चिम त्रिपुरा प्रशासन ने हिंसा को देखते हुए सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है. पश्चिम त्रिपुरा के जिलाधिकारी मिलिंद रामटेक के मुताबिक निषेधाज्ञा 13 पुलिस स्टेशन इलाकों में लागू की गई है जो अगले दो दिन तक प्रभावी रहेगी. वामपंथी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि परिणामों के बाद दल विशेष ने उनके कार्यालयों को ही सिर्फ़ निशाना नहीं बनाया, बल्कि उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं के घरों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है. अगरतला से सीपीएम के पूर्व विधायक झुमु सरकार जो इस बार चुनाव हार गए. अपने गांव में सहमे हुए हैं.