Tripura CM: अपने अजीबोगरीब बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहने वाले त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने अब एक बार फिर से अजीबोगरीब बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि यदि राज्य के 80 प्रतिशत घरों के दरवाजे पर स्वामी विवेकानंद की तस्वीर उनके संदेशों के साथ लगाई जाए तो राज्य में आगामी 30-35 साल तक भाजपा की सरकार सत्ता में रहेगी. उन्होंने ये बातें बुधवार को अगरतला में भाजपा महिला मोर्चा की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में कही. Also Read - त्रिपुरा पंचायत उपचुनाव: BJP ने 96 फीसदी सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल की

हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार मुख्यमंत्री देब ने कहा, “मैंने अपने गाँव में देखा है कि कम्युनिस्ट नेताओं ने अपने ड्राइंग रूम में ज्योति बसु, जोसेफ स्टालिन, माओ जेडॉन्ग की तस्वीरें लगा रखी हैं. उनकी तस्वीरें वहां लगी है जहां हम अपने देवताओं की तस्वीरें टांगते हैं.” Also Read - स्वामी विवेकानंदः कुंडली में ही लिखा था संन्यासी बनना, दुनिया को बताया- क्या है भारत

उन्होंने कहा, “क्या हमने पिछले ढाई साल में अपने घरों में स्वामी विवेकानंद की तस्वीरें टांगी? यदि त्रिपुरा के 80 प्रतिशत घरों में विवेकानंद की तस्वीरें लगी तो यह सरकार 30-35 सालों तक रहेगी.” Also Read - खूबसूरत तो ऐश्वर्या राय हैं, डायना हेडन नहीं हैं इंडियन ब्यूटी: बिप्लब देब

मुख्यमंत्री देब ने कहा, “स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि कम बात करनी चाहिए और चुप रहकर काम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. अगर हम बहुत ज्यादा बात करेंगे तो हमारी ऊर्जा बर्बाद जाएगी। ऐसे में हमें अपनी ऊर्जा बर्बाद नहीं करनी चाहिए.”

इस दौरान उन्होंने महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं से राज्य के हर घर में स्वामी विवेकानंद की तस्वीरें वितरित करने और उन्हें निश्चित रूप से घरों के दरवाजे पर ही लगवाने की अपील की.

मुख्यमंत्री देब ने कहा कि भाजपा और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) सरकार ने जनता के कल्याण के लिए सामाजिक पेंशन, सरकारी कर्मचारियों के वेतन, ग्राम पंचायत प्रधानों के मासिक भत्ते और राशि में इजाफा किया है.

इसके अलावा ई-सार्वजनिक वितरण प्रणाली, आयुष्मान त्रिपुरा स्वास्थ्य योजना, विधायक निधि राहत योजना आदि के लिए धन का आवंटित किया है. उन्होंने कार्यकर्ताओं से सरकार के सभी कार्यों की जानकारी रखने और लोगों को जागरुक करने की अपील भी की.

मुख्यमंत्री देब ने कहा कि बोलने और करने में बहुत अंतर होता है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने त्रिस्तरीय पंचायत प्रणाली शुरू करने का बीड़ा उठाया था, लेकिन उसके परिणाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजयपेयी के कार्यकाल में सामने आने लगे थे.

इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद ग्राम पंचायतों को सीधे 80 लाख रुपये का फंड देने का निर्णय किया है। उन्होंने गांधीजी के ग्राम स्वराज को लागू किया है.

बता दें कि मुख्यमंत्री देब ने अगस्त में कोरोना मरीजों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने और प्रेरित करने के लिए स्वामी विवेकानंद से जुड़ी किताबें भी वितरित की थी. उन्होंने कहा था कि इनको पढ़ने से कोरोना से लड़ने के लिए हिम्मत मिलेगी.