अगरतला/शिलांग/कोहिमा| पूर्वोत्तर के तीन राज्यों त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2019 के चुनाव के लिए आत्मविश्वास मजबूत कर लिया है.  त्रिपुरा में जहां बीजेपी ने 25 साल पुरानी लेफ्ट सरकार को उखाड़ फेंका वहीं नगालैंड में भी सहयोगी दल के साथ सबसे आगे निकल गई. हालांकि, पार्टी को मेघालय में अपेक्षित सफलता नहीं मिली और मात्र 4 सीटों पर सिमटती दिख रही है. त्रिपुरा की जीत के साथ बीजेपी ने 2019 लोकसभा चुनाव के लिए अपना हौसला मजबूत कर लिया. Also Read - Essay on Lenin by Ganesh Shankar Vidyarthi | लेनिन की मौत के बाद गणेशशंकर विद्यार्थी ने जो लिखा, उसे पढ़ना जरूरी है

त्रिपुरा में बीजेपी ने पलट दी लेफ्ट की सरकार

त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी और उसकी गठबंधन पार्टी इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा राज्य में सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है. राज्य में बीते 25 साल में सत्तासीन मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व में वाममोर्चा सत्ता से बेदखल हो रहा है. अब तक के रुझान के मुताबिक बीजेपी 41 सीटों पर आगे है और दो तिहाई बहुमत की ओर बढ़ रही है. रुझानों के मुताबिक, भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन 40 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो बहुमत की 31 सीटों से नौ सीटें ज्यादा है. वाममोर्चा सिर्फ 19 सीटों पर आगे है.

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इस प्रचंड जीत के बाद बीजेपी के महासचिव राम माधव ने कहा कि हम त्रिपुरा के रुझानों से खुश हैं, जहां बीजेपी 40 से अधिक सीटों से सरकार बनाती दिख रही है. सीपीएम ने त्रिपुरा में कड़ी टक्कर दी है लेकिन लोगों ने बदलाव के लिए मतदान किया है. इस जीत का श्रेय त्रिपुरा की जनता, पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को जाता है.

साल 2013 के विधानसभा चुनाव में वाममोर्चे ने 50 सीटें जीती थीं. बीजेपी खाता तक खोलने में असफल रही थी. कई उम्मीदवारों की तो जमानत तक जब्त हो गई थी. बीजेपी के विजेताओं में राज्य इकाई के भाजपा अध्यक्ष बिप्लब कुमार देब (बनामालीपुर), सुदीप रॉय बर्मन (अगरतला), रतनलाल नाथ (मोहनपुर), ए.रामपदा जमातिया (बगमा), दिलीप कुमार दास (बरजाला), दिबा चंद्र रांगकावल (करमचरा), आशीष कुमार साहा (बोरोवाली), रतन चक्रबर्ती (खायेरपुर), अतुल देबबर्मा (कृष्णपुर), सुशांत चौधरी (मजलिसपुर) हैं.

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दिग्गज वाम उम्मीदवारों में निवर्तमान जनजातीय कल्याण मंत्री अघोर देबबर्मा (आश्रमबाड़ी), वन एवं ग्रामीण विकास मंत्री नरेश चंद्र जमातिया (बगमा), उपसभापति पबित्रा कर (खायेरपुर), विजय लक्ष्मी सिन्हा (कमालपुर), समिरन मलाकर (पबियाचारा), मनोरंजन देबबर्मा (मंडई बाजार), रतन दास (रामनगर), महिंद्रा चंद्र दास (कल्याणपुर-प्रमोदनगर) और मुख्य सचेतक बसुदेब मजूमदार (बेलोनिया) पीछे चल रहे हैं. वाममोर्चे के जो उम्मीदवार आगे चल रहे हैं, उनमें मुख्यमंत्री और माकपा पोलितब्यूरो के सदस्य माणिक सरकार (धनपुर), स्वास्थ्य एवं लोककल्याण मंत्री बादल चौधरी (ऋषमुख), शिक्षा मंत्री तपन चक्रबर्ती (चांदीपुर), सूचना, खाद्य एवं नगारिक आपूर्ति मंत्री भानूलाल साहा (बिशालगढ़), खेल एवं युवा मामलों के मंत्री शाहिद चौधरी, विधानसभा अध्यक्ष रामेंद्र चंद्र देबबर्मा और जेल मंत्री महिंद्रा रेंग हैं.

नगालैंड में बीजेपी की धमक

नगालैंड विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने अपने सहयोगी दल के साथ शानदार प्रदर्शन किया है. बीजेपी और नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) 30 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. वहीं, सत्तारूढ़ नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) 15 सीटों पर आगे है. राज्य में 27 फरवरी को चुनाव हुआ था. बीजेपी ने राज्य में नवगठित एनडीपीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा है. बीजेपी ने 20 सीटों पर जबकि एनडीपीपी ने 40 सीटों पर चुनाव लड़ा है. राज्य की कुल 60 सदस्यीय विधानसभा सीटों में से 59 सीटों पर चुनाव हुआ था. राज्य के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके नेफ्यू रियो को पहले ही उत्तरी अंगामी-2 सीट से निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया था.

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रियो नगालैंड के तीन बार 2003-08, 2008-13 और 2013-14 में मुख्यमंत्री रहे थे. वह साल 2014 में नगालैंड की एकमात्र लोकसभा सीट से निर्वाचित हुए थे. यहां पर बीजेपी गठबंधन की सरकार बनती दिख रही है. असम, मणिपुर और अरूणाचल प्रदेश में सरकार बनाने से उत्साहित बीजेपी अब नगालैंड में अपने पांव पसारने की कोशिश में है. बीजेपी ने नगालैंड को अपने पाले में डालने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है. राजनीतिक पर्यवेक्षक पूर्वोत्तर राज्यों में सरकार बनाने की बीजेपी की कोशिश पर उत्सुकता से नजर बनाए हुए हैं. वैसे भी पूर्वोत्तर कांग्रेस का गढ़ रहा है और बीजेपी हाशिए पर ही रही है.

मेघालय में कांग्रेस सबसे आगे

मेघालय में कांग्रेस सबसे आगे रही. 60 सीटों में से 59 सीटों पर जारी मतगणना में कांग्रेस ने 21 सीटों पर बढ़त बनाई. नेशनल पीपुल्स पार्टी दूसरे नंबर पर रही. अन्य के खाते में 12 सीटें जाती दिख रही हैं. युनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) चौथे और बीजेपी पांचवे नंबर पर है. राज्य की 60 विधानसभा सीटों में से 59 पर 27 फरवरी को मतदान हुआ था. एक उम्मीदवार की मौत के कारण एक सीट पर चुनाव रद्द कर दिया गया था. केंद्र, राजस्थान और मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी कोनराड संगमा के नेतृत्व वाली एनपीपी मेघालय में अपने दम पर चुनाव लड़ रही है. अम्पाती विधानसभा में 1993 से लगातार पांच बार चुनाव जीतने वाले मुकुल संगमा ने फिर जीत दर्ज की.

बीजेपी महासचिव राम माधव ने आज दावा किया कि मेघालय में भी गैर कांग्रेसी सरकार बनाने की कवायद की जा रही है. उन्होंने कहा कि इसके लिए असम सरकार में मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा को मेघालय भेजा जा रहा है. हालांकि बीजेपी को बहुत कम सीटें मिलती दिख रही हैं.