अगरतला: पीडब्ल्यूडी घोटाला मामले में पूर्व मंत्री व वामपंथी नेता बादल चौधरी को चार दिन से तलाश रही त्रिपुरा पुलिस का हाथ शनिवार को भी खाली रहा. सुराग पाने में नाकाम रही पुलिस के एक बड़े अधिकारी सहित नौ कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है. भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी में विफलता पर एक आईपीएस अधिकारी और एक पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) सहित नौ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है और छह वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया है. पूर्व मंत्री चौधरी 1978 से आठ बार विधायक रहे हैं.

कानून एवं शिक्षा मंत्री रतन लाल नाथ के मुताबिक, पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) ने साल 2008-09 में 13 परियोजनाओं को एक साथ मिलाया था. इन परियोजनाओं के तहत पांच पुल, पांच इमारतें और तीन सड़कें बननी थीं. इन मदों पर 638 करोड़ रुपये खर्च दिखाया गया है, जो अनुमानित लागत से 10 प्रतिशत अधिक है. नाथ ने कहा कि 228 करोड़ रुपये का घपला किया गया है. त्रिपुरा के इतिहास में यह सबसे बड़ा घोटाला है.

स्थानीय मीडिया की खबरों के अनुसार, पुलिस महानिदेशक अखिल कुमार शुक्ला सहित कई पुलिस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री विप्लव कुमार देव से मुलाकात कर अपना आदेश वापस लेने का अनुरोध किया है. मंत्री नाथ ने इस सिलसिले में पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के सभी पूर्व मंत्रियों और उस दौरान काम कर चुके अधिकारियों से पूछताछ किए जाने की मांग की है.