हैदराबाद: खुद को आग लगाकर आत्महत्या का प्रयास करने वाले तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीएसआरटीसी) के एक चालक की रविवार को एक अस्पताल में मौत हो गई, जिसके बाद आक्रोशित रोडवेज कर्मियों और विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. श्रीनिवास रेड्डी ने शनिवार को खम्मान शहर में खुद को आग लगा ली थी, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गए थे. उन्हें हैदराबाद स्थित अपोलो डीआरडीओ अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी मौत हो गई. चालक ने यह आत्मघाती कदम टीएसआरटीसी कर्मियों के विरोध प्रदर्शन के दौरान उठाया था, जिनकी अनिश्चितकालीन हड़ताल रविवार को 9वें दिन में प्रवेश कर चुकी है.

कर्मचारी संघ का आरोप है कि रेड्डी को मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के उस फैसले के बाद अपनी नौकरी जाने का डर था, जिसमें उन्होंने कहा था कि लगभग 48,000 कर्मियों ने सरकार द्वारा तय अंतिम तिथि से पहले काम पर नहीं लौटकर अपनी नौकरी से हाथ धोया है. उन्होंने इन कर्मियों को टीएसआरटीसी में वापस नियुक्त करने से इनकार कर दिया था.

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चालक की मौत के बाद कंचनबाग क्षेत्र में अस्पताल के निकट तनाव फैल गया, जब टीएसआरटीसी कर्मचारी संघ के नेता और विपक्षी दल के नेता वहां पहुंच गए और रेड्डी की मौत के लिए सरकार को जिम्मेदार बताते हुए विरोध प्रदर्शन करने लगे.

बता दें कि राज्य सरकार के इस फैसले का बाद से चंद्रशेखर राव के खिलाफ इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. माकपा ने ‘आरटीसी को बचाओ’ के नाम पर शहर में रैली निकाली थी. तेलंगाना भाजपा के विधान परिषद सदस्य रामचंद्र राव ने कहा कि सरकार को फायदे के लिए नहीं बल्कि सेवा के लिए काम करना चाहिए. राव ने कहा, ‘सरकार कारोबार करने के लिए नहीं है. वह जन सेवा और जन कल्याण के लिए है. सरकार को यह बात दिमाग में रखनी चाहिए.’

तेलुगू देशम पार्टी के वरिष्ठ नेता रावुला चंद्रशेखर ने कहा कि आरटीसी के कुछ मार्गों का निजीकरण एक अनुचित विचार है और पहले एक बार ऐसा ही करने पर पूर्ववर्ती आंध्र प्रदेश के एक मुख्यमंत्री को पद छोड़ना पड़ा था. माकपा की तेलंगाना इकाई के सचिव टी वीरभद्रम, तेलंगाना जन समिति के प्रमुख कोडनडरम और उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी चंद्र कुमार ने बैठक में भाग लिया. निगम के 48 हजार कर्मचारियों के काम पर नहीं आने और सरकारी बसों के सड़कों पर नहीं उतरने की वजह से यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.

टीएसआरटीसी के विभिन्न कर्मचारी संगठनों के सदस्यों ने आरटीसी का सरकार में विलय करने, अनेक पदों पर भर्ती करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर निगम की संयुक्त कार्य समिति के आह्वान पर तेलंगाना राज्य में पांच अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी. हड़ताल पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि किसी भी परिस्थिति में आरटीसी का सरकार में विलय नहीं किया जाएगा.

(इनपुट-भाषा)