नई दिल्ली: देशभर के ट्रकों की आज से हड़ताल शुरू हो गई है. ट्रक यूनियन ने डीजल की कीमतों और टोल की दरों में कमी जैसे मांगों के लिए हड़ताल का आह्वान किया है. इसकी घोषणा 17 मई को की गई थी. यूनियन का दावा है कि इसमें करीब 93 लाख ट्रक चालक शामिल हैं. इसके चलते शुक्रवार सुबह स्कूली बच्चों को खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. Also Read - Coronavirus Effect: लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था को हो सकता है नौ लाख करोड़ रुपए का नुकसान

गुरुवार रात को सरकार ने हड़ताल रोकने के अंतिम प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली. गुरुवार शाम को ट्रक यूनियन के पदाधिकारियों की पहले परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और रात को वित्त मंत्री पीयूष गोयल से बातचीत हुई, लेकिन इनका कोई नतीजा नहीं निकला. ट्रक संचालकों का दावा है कि हड़ताल से उन्हें हर दिन 4 हजार करोड़ रुपए का नुकसान होगा. 

ट्रक मालिकों की मुख्य मांग है केंद्र और राज्य सरकारों के कर में कमी कर डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना. वे टोल की दरों के लिए भी पारदर्शी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं. ट्रक यूनियनों का मानना है कि टोल पर होने वाली मुश्किलों के चलते हर साल 1.5 ट्रिलियन रुपए का नुकसान होता है. वे इंश्योरेंस की ऊंची प्रमियम दरों में कमी की भी मांग कर रहे हैं.

नितिन गडकरी के कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक गुरुवार रात को ट्रक संचालकों को बताया गया कि उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान संभव नहीं है, लेकिन सरकार इन पर गंभीरता से विचार कर रही है.