नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार सुबह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर अहम बातचीत की. इस बातचीत में दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई. मोदी-ट्रंप ने मालदीव संकट के विषय पर भी चर्चा की. वाइट हाउस ने बताया कि दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान, भारतीय उपमहाद्वीप, सिक्यॉरिटी और टेररिज्म पर बातचीत की.Also Read - PM Modi’s 71st Birthday: 71 साल के हुए प्रधानमंत्री मोदी, राष्‍ट्रपति, अमित शाह ने दी बधाई, BJP का सेवा-समर्पण अभियान आज से

Also Read - भाजपा महासचिव ने प्रदर्शनकारी किसानों को बताया ‘हुड़दंगी’, बोले- देश के 99.99 फीसदी किसान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर बातचीत के दौरान मालदीव के राजनीतिक हालात पर चिंता जताई. वाइट हाउस ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच अफगानिस्तान की स्थिति और हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. इस साल ट्रंप और मोदी के बीच फोन पर हुई पहली बातचीत के बारे में वाइट हाउस ने कहा, ‘दोनों नेताओं ने मालदीव में राजनीतिक संकट पर चिंता जताई और लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा विधि के शासन का सम्मान करने के महत्व पर जोर दिया.’ Also Read - ट्रंप ने की बाइडेन की आलोचना, कहा- सेना की वापसी इतनी बुरी तरह कभी नहीं हुई

वाइट हाउस ने बताया कि दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और समृद्धि बढ़ाने पर भी बातचीत की. मोदी और ट्रंप ने म्यांमार और रोहिंग्या शरणार्थियों की समस्याओं को हल करने पर भी बातचीत की. बता दें कि बीते हफ्ते से ही मालदीव में उठापटक का दौर चल रहा है. मालदीव के राष्ट्रपति ने देश में इमरजेंसी घोषित कर दी जिसके बाद पूर्व राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के जज को गिरफ्तार कर लिया गया. 

मालदीव संकटः राष्ट्रपति यामीन ने भारत को चिढ़ाया, चीन, पाक और सऊदी में भेजा दूत

मालदीव संकटः राष्ट्रपति यामीन ने भारत को चिढ़ाया, चीन, पाक और सऊदी में भेजा दूत

मालदीव ने बनाई भारत से दूरी?

मालदीव में जारी राजनीतिक संकट के बीच राष्ट्रपति अब्दुला यामीन ने बुधवार को चीन, पाकिस्तान और सऊदी अरब में दूत भेजने की घोषणा की. द्वीपीय देश में सत्ता संघर्ष में आगे दिख रहे यामीन ने अपने पड़ोसी और लंबे समय से मित्र देश रहे भारत में दूत नहीं भेजा है. माना जाता है कि भारत मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद का समर्थक है और इसी कारण उन्होंने अपना कोई दूत भारत नहीं भेजा है.

नशीद ने अपने देश में जारी राजनीतिक संकट के समाधान के लिए भारत से ‘त्वरित कार्रवाई’ की मांग की थी. राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के आपातकाल की घोषणा करने और सैनिकों द्वारा देश के प्रधान न्यायाधीश को गिरफ्तार कर लेने के बाद देश में राजनीतिक संकट पैदा हो गया है.

भारत-चीन टकराव का नया केंद्र!

मालदीव के राजनीतिक संकट पर चीन और भारत दोनों की निगाहें टिकी हुई हैं. मालदीव सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच तनाव की वजह से यह संकट पैदा हुआ है. मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानने से इनकार करते हुए आपातकाल की घोषणा कर रखी है. सुप्रीम कोर्ट ने मालदीव के राजनीतिक संकट के हल के लिए भारत से मदद मांगी है. वहीं पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भी भारत से सैन्य  हस्तक्षेप की मांग की है. दूसरी ओर चीन का कहना है कि भारत को मालदीव के आंतरिक मामले में दखल नहीं देना चाहिए. 

भारत चीन के बीच टकराव का नया केंद्र बन सकता है मालदीव

भारत चीन के बीच टकराव का नया केंद्र बन सकता है मालदीव

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुआ संकट

मालदीव में संकट तब पैदा हुआ जब बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद विपक्ष के 9 नेताओं को रिहा करने का आदेश दिया. अदालत ने कहा कि उन पर मुकदमा राजनीति से प्रभावित और दोषपूर्ण है. सरकार ने आदेश के क्रियान्वयन से इनकार कर दिया जिसके बाद राजधानी माले में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं. इन झड़पों के बाद यामीन ने आपातकाल घोषित कर दिया.

आपातकाल की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद चीफ जस्टिस अब्दुल्ला सईद और अन्य न्यायाधीश अली हामिद को गिरफ्तार कर लिया गया. जांच या आरोप के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई. विपक्ष का साथ देने वाले पूर्व राष्ट्रपति मामून अब्दुल गय्यूम को उनके घर में नजरबंद कर दिया गया.