ईरान पर फिर बरसे ट्रंप! 'आज रात होगा बड़ा हमला', खार्ग द्वीप पर कब्जे की धमकी से फिर बढ़ी टेंशन

Written By: Tanuja Joshi Updated by: Tanuja Joshi
Updated Date:June 11, 2026 6:56 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए नए सैन्य हमलों की चेतावनी दी है. खार्ग द्वीप और तेल ढांचे को लेकर दिए गए उनके बयान ने मिडिल ईस्ट में तनाव और कूटनीतिक हलचल दोनों को तेज कर दिया है.

मिडिल ईस्ट में जारी अस्थिरता के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्ते एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर ऐसा बयान दिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है. ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ और अधिक सैन्य कार्रवाई कर सकता है और भविष्य में उसके महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाने की रणनीति भी अपना सकता है.

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ट्रंप का ये बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में पहले से ही सैन्य गतिविधियां बढ़ी हुई हैं और कई देशों को आशंका है कि हालात किसी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को पहले ही गंभीर नुकसान पहुंचाया जा चुका है और अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका आगे भी कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा.

सबसे ज्यादा चर्चा ट्रंप के उस बयान की हो रही है जिसमें उन्होंने ईरान के खार्ग द्वीप का उल्लेख किया. खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र माना जाता है और देश की अर्थव्यवस्था में इसकी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इस क्षेत्र को लेकर किसी तरह की सैन्य कार्रवाई होती है तो उसका असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हो सकता है.

हालांकि, बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं. अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क और बातचीत अभी पूरी तरह बंद नहीं हुई है. दोनों पक्ष कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कई बड़े मतभेद अब भी बने हुए हैं. विशेष रूप से विदेशों में जमा ईरानी संपत्तियों और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दे बातचीत में प्रमुख बाधा बने हुए हैं.

क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

सूत्रों का कहना है कि ईरान आर्थिक राहत और जमे हुए धन तक पहुंच को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि अमेरिका चरणबद्ध और सीमित व्यवस्था की बात कर रहा है. यही वजह है कि बातचीत आगे बढ़ने के बावजूद अंतिम समझौता अभी दूर दिखाई देता है. दूसरी तरफ, सैन्य घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में सतर्कता बढ़ा दी गई है और वैश्विक बाजार भी घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं. तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं.

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