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Silkyara Tunnel Collapse: PM मोदी ने टनल में फंसे 40 श्रमिकों के बारे में दोबारा ली जानकारी, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
Uttarakhand के ब्रह्मखाल-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिल्क्यारा और डंडालगांव के बीच निर्माणाधीन सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने से मजदूर फंस गए थे
Uttarakhand, CM Dhami, Uttarkashi : उत्तराखंड में सिल्कयारा सुरंग ढहने से फंसे 40 श्रमिकों को बचाने और निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है. इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को फोन कॉल करके टनल में फंसे 40 श्रमिकों के बारे में एक बार फिर से ली जानकारी ली है. अब तक प्रधानमंत्री दो बार मुख्यमंत्री से स्थिति की जानकारी ले चुके हैं.
अधिकारियों ने कहा है कि श्रमिकों को बाहर निकालने में संभवत: एक-दो दिन और लग सकते हैं.बता दें कल रविवार तड़के ब्रह्मखाल-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिल्क्यारा और डंडालगांव के बीच निर्माणाधीन सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने से कम से कम 40 मजदूर फंस गए थे .अधिकारियों का कहना है, उम्मीद है कि कल रात तक अंदर फंसे 40 लोगों को निकाल लिया जाएगा.अधिकारियों के अनुसार, 36 घंटे से अधिक समय से सुरंग में फंसे सभी श्रमिक सुरक्षित हैं और उनसे संपर्क स्थापित कर लिया गया है.
मुख्यमंत्री ने राहत और बचाव कार्यों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि विभिन्न राज्य और केंद्रीय एजेंसियां परस्पर समन्वय और तत्परता के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं. मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण किया और बचाव कार्यों पर लगातार नजर रखें हैं. बचाव कार्य के लिए बड़े व्यास के ह्यूम पाइप हरिद्वार और देहरादून से भेजे जाने की व्यवस्था कर दी गई है, मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरंग के अंदर फंसे सभी मजदूर सुरक्षित हैं और उन्हें जल्द बाहर निकलने की पूरी कोशिश की जा रही है.
बता दें सिलक्यारा में 4.531 किमी लंबी दो लेन की द्वि-दिशात्मक सुरंग (two lane bi-directional tunnel) का निर्माण शुरू किया गया है.
उम्मीद है कि कल रात तक अंदर फंसे 40 लोगों को निकाल लिया जाएगा
उत्तरकाशी सुरंग हादसे पर एसपी अर्पण यदुवंशी का कहना है, “बचाव अभियान जारी है, सभी एजेंसियां और तकनीकी विशेषज्ञ यहां पहुंच चुके हैं. 60 मीटर मलबे में से 20 मीटर से ज्यादा मलबा हटा दिया गया है. हमें उम्मीद है कि कल रात तक अंदर फंसे 40 लोगों को निकाल लिया जाएगा. उन्हें पाइप के माध्यम से ऑक्सीजन, भोजन और पानी सहित सभी बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं. फंसे हुए लोगों के परिवार के सदस्यों से भी संपर्क किया गया है.
सुरंग के अंदर लोगों के कम से कम 5-6 दिनों तक जीवित रहने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन
उत्तरकाशी सुरंग हादसे पर राज्य के आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत कुमार सिन्हा का कहना है, “…चूंकि वहां नरम चट्टान थी, इसलिए दबाव के कारण यह ढह गई। इसका उपचार बाद में किया जाएगा। फिलहाल हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी लोगों को सुरक्षित बचाना है.” .हमें उम्मीद है कि कल या परसों तक लोगों को सुरक्षित बचा लिया जाएगा…सुरंग के अंदर लोगों के कम से कम 5-6 दिनों तक जीवित रहने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन है. हम वॉकी-टॉकी के माध्यम से फंसे हुए लोगों से बात करने में सक्षम हैं.
Till now the Prime Minister has taken information about the situation from the Chief Minister twice. Union Home Minister and Railway Minister have also talked to CM Dhami. Central agencies and experts are present at the spot: CMO
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) November 13, 2023
केंद्रीय एजेंसियां और एक्सपर्ट मौके पर मौजूद
केंद्रीय गृह मंत्री और रेल मंत्री भी सीएम धामी से बात कर चुके हैं. केंद्रीय एजेंसियां और एक्सपर्ट मौके पर मौजूद हैं. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि उत्तराखंड में सिल्कयारा सुरंग ढहने की जगह पर फंसे श्रमिकों को जल्द से जल्द निकालने के लिए समन्वित प्रयास किये जा रहे हैं.
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने दूरभाष के माध्यम से सिल्क्यारा के पास निर्माणाधीन टनल में हुई दुर्घटना में फंसे श्रमिकों की वस्तुस्थिति की जानकारी ली। इस दौरान उन्हें फंसे हुए लोगों को सकुशल बाहर निकालने के लिए चलाए जा रहे राहत एवं बचाव कार्यों से अवगत कराया।
आज…
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) November 13, 2023
12 नवंबर को सुबह 05: 30 बजे लगभग 40 श्रमिक सुरंग के अंदर फंस गए
मंत्रालय के बयान के अनुसार, 12 नवंबर, 2023 को सुबह 05: 30 बजे लगभग 40 श्रमिक सुरंग के अंदर सिल्कयारा पोर्टल से 260 मीटर से 265 मीटर की दूरी पर रिप्रोफाइलिंग का काम कर रहे थे, जब 205 मीटर से 260 मीटर की दूरी पर एक हिस्सा ढह गया और कॉन्ट्रैक्ट पर आधारित सभी 40 श्रमिक फंस गए.
फंसे हुए कार्यबल को जल्द से जल्द निकालने के लिए सभी समन्वित प्रयास किए जा रहे
मंत्रालय ने कहा, “घटना की सूचना तुरंत राज्य/केंद्र सरकार की सभी संबंधित एजेंसियों को दी गई और बचाव कार्य शुरू किया गया…फंसे हुए कार्यबल को जल्द से जल्द निकालने के लिए सभी समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं.” फंसे हुए श्रमिकों के साथ वॉकी टॉकी के माध्यम से संचार स्थापित किया गया है. सड़क परिवहन मंत्रालय ने कहा, विशेषज्ञों के बीच चर्चा और रात भर घटना स्थल का निरीक्षण के बाद अंदर फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए हाइड्रोलिक जैक की मदद से 900 मिमी व्यास वाले एमएस स्टील पाइप को धकेलने का निर्णय लिया गया है.
आरवीएनएल, एनएचआईडीसीएल, सीजीएम एनएचएआई और एसडीआरएफ बचाव अभियान में
सिंचाई विभाग के विशेषज्ञों के साथ आज शाम तक आदमी, सामग्री और मशीनरी की उपलब्धता की पहचान कर ली गई है. इसके अलावा आरवीएनएल, एनएचआईडीसीएल, सीजीएम एनएचएआई और एसडीआरएफ के अधिकारियों ने पहुंचकर घटना स्थल का निरीक्षण किया और बचाव अभियान की बारीकी से निगरानी की. बयान में कहा गया है कि ध्वस्त सुरंग के 40 मीटर के लिए शॉटक्रेटिंग के साथ खुदाई शुरू हो गई है, अतिरिक्त शॉटक्रेटिंग मशीन को भी आरवीएनएल से कार्य स्थल पर स्थानांतरित कर दिया गया है.
कुल परियोजना के लिए 1,383 करोड़ रुपये की लागत
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने चारधाम महामार्ग परियोजना ( Chardham Mahamarg Pariyojana) के हिस्से के रूप में उत्तराखंड में राडी पास के तहत गंगोत्री और यमुनोत्री अक्ष को जोड़ने के लिए सिल्क्यारा में 4.531 किलोमीटर लंबी दो लेन सुरंग का निर्माण शुरू किया है. 9 मार्च, 2018 को मंत्रालय ने टीपीसी (कुल परियोजना) के लिए 1,383 करोड़ रुपये की लागत की मंजूरी इसकी कंपनी राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड ((NHIDCL) द्वारा कार्यान्वयन के लिए दी थी.
सुरंग के निर्माण से तीर्थयात्रियों को लाभ होने की उम्मीद है, इससे हर मौसम में कनेक्टिविटी मिलेगी
बता दें कि इस सुरंग के निर्माण से तीर्थयात्रियों को लाभ होने की उम्मीद है, इससे हर मौसम में कनेक्टिविटी मिलेगी और बर्फ से प्रभावित 25.6 किलोमीटर एनएच-134 (धरासू-बारकोट-यमुनोत्री रोड) की लंबाई 4.531 किलोमीटर वर्तमान में 50 मिनट से घटकर 5 मिनट हो जाएगी.
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