नई दिल्ली। तमिलनाडु सरकार ने तूतीकोरिन में वेदांता समूह के कॉपर प्लांट को स्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया है. सरकारी सूत्रों के हवाले से ये खबर आई है. तमिलनाडु सरकार ने राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से वेदांता समूह के कॉपर प्लांट को सील करने के लिए कहा है. भारी हंगामे और पुलिस से झड़प में 13 लोगों की मौत के बाद से ये प्लांट बंद है. इस फैसले से वेदांता को तगड़ा झटका लगा है. वेदांता इसी प्लांट से सबसे ज्यादा कॉपर का उत्पादन करता है और इसी की बदौलत वह कॉपर उत्पादन में देश में दूसरे नंबर पर है. Also Read - Cyclone Nivar: तेजी से बढ़ रहा चक्रवाती तूफान निवार, इन राज्यों में मचा सकता है भारी तबाही, देखें VIDEO

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सरकारी आदेश में कहा गया है कि यह प्लांट को बंद करने के तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के हालिया निर्देश का समर्थन करता है. इसमें राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कहा गया कि वह  इकाई को सील और प्लांट को स्थाई रूप से बंद कर दे. दस्तावेज में व्यापक जनहित में तांबा कारखाने को स्थाई रूप से बंद करने का आदेश देने के लिए राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों-पर्यावरण संरक्षण से संबंधित अनुच्छेद 48 ए और जल कानून 1974 के प्रावधानों का जिक्र किया गया. Also Read - Coronavirus Crisis in India: देश में कोरोना की कहीं दूसरी तो कहीं तीसरी लहर का प्रकोप, यहां देखें किस राज्य में कितने मामले

इसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नौ अप्रैल के आदेश का जिक्र किया गया जिसमें तूतीकोरिन में वेदांता के तांबा पिघलाने वाले संयंत्र के लिए संचालन अनुमति का नवीनीकरण करने से इनकार कर दिया गया था. आदेश में जिक्र किया गया कि तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 23 मई को इकाई को बंद करने और इसकी बिजली काटने के दिशानिर्देश जारी किए थे. इसके एक दिन बाद इसकी बिजली काट दी गई थी. मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने कहा कि सरकार ने लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए आदेश दिया है.

हिंसा में गई थी 12 की जान

तूतीकोरिन में प्रदूषण की चिंता से स्टरलाइट कॉपर फैक्ट्री को बंद करने की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन के दौरान 22 मई को हिंसा फैल गई थी और पुलिस गोलीबारी में 13 लोगों की जान चली गई थी. यह प्रदर्शन तीन महीने से चल रहा था. तभी से इस प्लांट को बंद कर दिया गया है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई है.

स्टरलाइट प्लांट बंद कराने को दो दशक से चल रहा आंदोलन

राज्य सरकार ने इस हिंसा की जांच के लिए मद्रास हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश अरूणा जगदीशन के नेतृत्व में एक आयोग का गठन किया है. घटना के लगातार दूसरे दिन हिंसा होने के बाद राज्य सरकार ने तूतीकोरिन के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक का तबादला कर दिया था. तूतीकोरिन में हुई हिंसा और मौजूदा स्थिति के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने तमिलनाडु सरकार से रिपोर्ट मांगी थी.

1997 से ही हो रहा प्लांट का विरोध

साल 1997 में स्टरलाइट कॉपर प्लांट के उत्पादन शुरू करने के पहले से ही तूतीकोरिन के लोग इस प्लांट का विरोध करते आ रहे हैं. लोगों का कहना है कि प्लांट से तांबे का उत्पादन शुरू होने के बाद इसके अपशिष्ट (कॉपर वेस्ट) से भूजल प्रदूषित हो रहा है. घरों में पहुंचने वाला पानी गंदा होता है, जिससे बीमारियां फैलती हैं. इसलिए लोग चाहते हैं कि स्थाई रूप से इस प्लांट को बंद कर दिया जाए.

स्टरलाइट कॉपर यूनिट के विरोध में हिंसक हुआ प्रदर्शन, कई की मौत

लोगों के प्रदर्शन के बाद हाईकोर्ट ने हालांकि प्लांट के विस्तार पर अंतरिम रोक लगा दी है, लेकिन कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि विस्तारीकरण की प्रक्रिया शुरू करने से 4 महीने पहले स्थानीय लोगों से राय ली जाए.