नई दिल्ली/चेन्नई. तमिलनाडु में प्रेग्नेंसी रेट में पिछले 9 महीने में आश्चर्यजनकतौर पर वृद्धि देखने को मिली है. राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, अप्रैल से 12 दिसंबर तक की बात करें तो 18 साल से कम उम्र की 20 हजार टीनएज लड़कियों में प्रेग्नेंसी के केस देखे गए हैं.

अंग्रेजी वेबसाइट्स टाइम्स ऑफ इंडिया ने तमिलनाडु के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के हवाले से लिखा है, प्रेग्नेंट होने वाली लड़कियों की औसत उम्र 16 से 18 साल है. इसमें ज्यादातर शादीशुदा हैं. ये राज्य में 18 से कम उम्र की बच्चियों की शादी की स्थिति को दर्शाता है.

अबॉर्शन का मामला बहुत कम
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें अबॉर्शन का मामला बहुत कम है. ज्यादातर लड़कियां चाहती हैं कि वह बच्चे पैदा करें. हालांकि, इतनी छोटी उम्र में बच्चे पैदा करने के कई खतरे होते हैं. ऐसे में डॉक्टर काफी सावधानी बरतते हैं. इसके साथ ही वे सेक्स एजुकेशन को लेकर जागरूक करने का भी प्रयास कर रहे हैं.

10 साल का रेशियो
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2008 से 2018 के बीच सिर्फ 6965 चाइल्ड मैरेज के केस रिकॉर्ड किए गए हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यहां सामाजिक समस्या से ज्यादा स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं हैं. छोटी उम्र में प्रेग्नेंसी से स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है.

डराने वाले हैं आंकड़े
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन स्टडीज की एक स्टडी के मुताबिक, बच्चों को सेक्स एजुकेशन के बारे में बताने की बहुत जरूरत है. टीनएज में सबसे ज्यादा डेली वेजर्स के घर की बच्चियों के प्रेग्नेंसी के केस हैं, जिसमें 64 फीसदी लड़कियां हैं. 32 फीसदी ऐसी लड़कियां हैं जो अपने पार्टनर द्वारा छोड़ दी गई रहती हैं तो 47 फीसदी 18 साल होने का इंतजार कर रही होती हैं.