नई दिल्ली/बेंगलुरु. कर्नाटक में बहुमत साबित करने के लिए विधायकों को अपने पाले में लाने के सभी दांव-पेंच के बीच कांग्रेस ने छह ऑडियो क्लिप भी जारी किए गए थे. इसमें दावा किया गया था कि बीजेपी से जुड़े लोग कांग्रेस के विधायकों और उनके परिवार को फोन करके समर्थन देने के लिए दबाव डाल रहे हैं और लालच दे रहे हैं. इसी बीच येल्लापुर से कांग्रेस विधायक शिवराम हेब्बर ने कहा है कि उनकी पत्नी को बीजेपी से किसी तरह का कॉल नहीं आया था. कांग्रेस का ऑडियो टेप फर्जी है.

शिवराम ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, मुझे इस बात के बारे में देर से मालूम हुआ कि न्यूज चेनलों पर मेरी पत्नी और बीजेपी नेताओं के बीच फोन पर संदेहास्पद बातचीत का कोई टेप चल रहा है. इसकी काफी चर्चा है. लेकिन, वह मेरी पत्नी की आवाज नहीं है. मेरी पत्नी ने कोई फोन रिसीव नहीं किया. इस टेप को रिलीज करने वाले पर धिक्कार है. फर्जी ऑडियो टेप की मैं निंदा करता हूं. उन्होंने कहा कि मैं अपने क्षेत्र के लोगों को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे दोबारा मौका दिया.

दूसरी तरफ अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने तीन दिन पहले ही प्लान बनाकर विधायकों को कह दिया था कि वे अपने फोन कॉल को रिकॉर्ड करें. इसी बीच कथित मिडिलमैन ने कांग्रेस के विधायकों से कॉन्टेक्ट करने की कोशिश की थी.

बातचीत के रिकॉर्डिंग का प्लान बनाया
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के हवाले से एक्सप्रेस ने रिपोर्ट में लिखा है, मीडिलमैन ने हमसे कहा कि उसे बीजेपी के लिए कांग्रेस विधायकों से बात करने के लिए कहा गया है. पाला बदलने के लिए बीजेपी के वरिष्ठ नेता उससे व्यक्तिगत तौर पर बात करेंगे. उसकी बात सुन हमने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से बात की और हमारे विधायकों से बीजेपी नेताओं की फोन पर होने वाली बात और पूरी सौदेबाजी को रिकॉर्ड करने का निर्णय लिया.

मिडिलमैन ने ही महिला का फोन नंबर पहुंचाया
रिपोर्ट में कहा गया है कि मीडिलमैन के माध्यम से ही कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी के पास एक महिला का फोन नंबर पहुंचाया. उन्हें यह बताया गया कि वह विधायक की पत्नी हैं. इसके बाद येदियुरप्पा से नजदीकी रखने वाले दो बीजेपी नेताओं ने उस महिला को फोन किया और उन्हें मंत्रीमंडल के साथ-साथ दूसरे ऑफर दिए गए. महिला ने इस बातचीत को भी रिकॉर्ड कर कांग्रेस नेताओं को दे दिया था.

स्टिंग ऑपरेशन की तरह हो रहा था सबकुछ
रिपोर्ट में कांग्रेस सूत्रों के हवाले से लिखा गया है कि यह एक स्टिंग ऑपरेशन की तरह था. हम इस स्टिंग से पूरी दूरी बनाए रखना चाहते थे. हम कैश लेन-देने को कैमरे में कैप्चर करना चाहते थे. लेकिन हमारे नेता इस पक्ष में नहीं थे और हमने रिकॉर्डिंग का प्लान बनाया.