नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी में एक के बाद एक बड़े नेताओं की विदाई का सिलसिला जारी है. सबके मन में यही सवाल है कि आखिर पिछले कुछ सालों में ऐसा क्या हो गया कि बड़े नेता पार्टी से विदाई लेते जा रहे हैं. आशुतोष और आशीष खेतान के पार्टी से इस्तीफे के ऐलान से साफ हो गया है कि पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. कुमार विश्वास तो पहले ही दरकिनार कर दिए गए हैं, अब आशुतोष और खेतान ने भी पार्टी से किनारा कर लिया. Also Read - दिल्ली सरकार को हाईकोर्ट का झटका, निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए 80% ICU बेड रिजर्व रखने के आदेश पर रोक

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ट्वीट-रीट्वीट से मिला संकेत Also Read - अरविंद केजरीवाल की गैर भाजपा दलों से अपील- राज्यसभा में कृषि विधेयकों के खिलाफ करें वोट

लेकिन सवाल है कि क्या इन दोनों नेताओं के इस्तीफे अचानक हुए? सोशल मीडिया पर नजर डालें तो साफ संकेत मिलता है कि दोनों को सीएम और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल की तरफ से लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था. अगर अरविंद केजरीवाल के ट्वीट और रीट्वीट को संकेत माना जाए तो आशुतोष और आशीष खेतान अपने इस्तीफे के ऐलान से बहुत पहले ही केजरीवाल का समर्थन गंवा चुके थे.

आशुतोष के बाद ‘आप’ के खेतान भी निजी कारण बताकर सक्रिय राजनीति से अलग हुए

पत्रकारिता से राजनीति में आए आशुतोष और आशीष का पार्टी में घटता कद और शीर्ष नेतृत्व से उनके संबंधों की स्थिति मुख्यमंत्री केजरीवाल के ट्विटर टाइमलाइन पर झलकती है. केजरीवाल के ट्विटर खाते पर बीते दो महीने से अधिक समय के ट्वीट और रीट्वीट के विश्लेषण से इसका अंदाजा लगता है. बीते 18 जून से 15 अगस्त तक केजरीवाल ने आशुतोष के सिर्फ दो ट्वीट और आशीष के सिर्फ तीन ट्वीट को रीट्वीट (साझा) किया, जबकि केजरीवाल ने अपने करीबी नेताओं के ट्वीटों को इसी अवधि में कई बार रीट्वीट किया है.

केजरीवाल ने इस तरह की अनदेखी

आप की राजनीति पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि केजरीवाल द्वारा कभी अपने काफी करीबी रहे आशुतोष और आशीष को इस तरह अनदेखा करना काफी कुछ कहता है. बीते 18 जून से 15 अगस्त तक की अवधि में केजरीवाल ने उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित अपनी पार्टी के सदस्यों के 102 ट्वीट को रीट्वीट किया. उन्होंने पत्रकारों के 80 और अन्य पार्टियों के नेताओं के 11 ट्वीट को रीट्वीट किया. इसमें केजरीवाल के ट्वीट और कुछ अन्य रीट्वीट शामिल नहीं हैं.

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केजरीवाल के ट्विटर खाते के विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि उन्होंने इसी अवधि में सिसोदिया के 31 ट्वीट और ‘आप’ की दिल्ली इकाई के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज के 19 ट्वीट को रीट्वीट किया. आप के एक नेता ने बताया कि केजरीवाल अपना ट्विटर खाता खुद ही संभालने के लिए जाने जाते हैं और इसके लिए उनकी सोशल मीडिया टीम ‘इनपुट’ (सामग्री/सुझाव) मुहैया कराती है.

केजरीवाल ज्यादातर ऐसे ट्वीट को रीट्वीट करते हैं जिनमें दिल्ली सरकार के कामकाज की तारीफ की गई हो या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भाजपा की आलोचना की गई हो. आप के सूत्रों ने बताया कि केजरीवाल और बागी नेता कुमार विश्वास के बीच का तनाव भी उस वक्त सामने आया था जब मुख्यमंत्री ने उनके ट्वीट को रीट्वीट करना बंद कर दिया था.