भुवनेश्वर. ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दो वरिष्ठ नेताओं दिलीप रॉय (Dilip Roy) और बिजोय महापात्र (Bijoy Mohapatra) ने शुक्रवार को पार्टी की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया. पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं विधानसभा में राउरकेला का प्रतिनिधित्व कर रहे रॉय ने सदन की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया. दोनों नेताओं ने इस बाबत पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को एक संयुक्त पत्र भेजा है. रॉय ने बताया कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष प्रदीप अमात को शुक्रवार को सदस्यता से त्यागपत्र भेज दिया है. रॉय ने टि्वटर जारी एक बयान में कहा, ‘‘बहुत दुखी मन से मैंने राज्य विधानसभा के साथ साथ भाजपा की सदस्यता को भी छोड़ने का फैसला किया है.’’ दोनों विधायकों ने राज्य के विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजे अपने पत्र में कहा है कि पार्टी में उनकी हैसियत ‘फर्नीचर’ यानी टेबल-कुर्सी की तरह निष्क्रिय हो गई है, जबकि ओडिशा की ‘जड़ों से अलग एक नेता’ को प्रदेश में बड़े चेहरे के रूप में पेश किया जा रहा है. सियासी जानकारों के अनुसार ओडिशा के दोनों विधायकों का इशारा केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तरफ है, जिन्हें भाजपा की ओर से आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने की बात की जा रही है. Also Read - पश्चिम बंगाल में बोले जेपी नड्डा, बहुत जल्द लागू होगा नागरिकता संशोधन कानून

भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद महापात्रा ने संवाददाताओं को बताया कि राज्य का हित उनके लिए सर्वोपरि है और वह अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में कोई फैसला अगले पखवाड़े करेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में उनके सुझावों और विचारों को अनदेखा किया जा रहा था. हालांकि दोनों विधायकों के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा राज्य इकाई के अध्यक्ष बसंत पांडा ने कहा कि उनके चले जाने से पार्टी पर कोई असर नहीं होगा. लेकिन सियासी जानकारों का कहना है कि ये दोनों नेता प्रदेश भाजपा के दिग्गज नेताओं में से एक माने जाते रहे हैं. इनके पार्टी छोड़ने से भाजपा की प्रदेश इकाई और ओडिशा की राजनीति में हलचल जरूर मचेगी. आपको बता दें कि भाजपा से इस्तीफा देने वाले दिलीप रॉय जहां राउरकेला विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं, वहीं बिजोय महापात्रा केंद्रपाड़ा असेंबली सीट से कई बार जनप्रतिनिधि के तौर पर चुने जाते रहे हैं.

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दिलीप रॉय ने भाजपा की सदस्यता और विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद फेसबुक पर लिखे गए अपने पोस्ट में यह भी कहा है कि वे अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा के चुनावों में नहीं उतरेंगे. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, रॉय ने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि वे 2019 के विधानसभा चुनाव में राउरकेला से चुनाव नहीं लड़ेंगे, क्योंकि उन्होंने वहां की जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं किया है. रॉय ने भाजपा अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में मुख्य रूप से राउरकेला से जुड़े दो मुद्दों की ओर ध्यान दिलाया है, जिसमें उनका आरोप है कि पार्टी की ओर इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इन मुद्दों में इंदिरा गांधी हॉस्पिटल को सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करने और ब्राह्मणी नदी पर दूसरा पुल न बनाया जाना शामिल है.

(इनपुट – एजेंसी)