नई दिल्ली/जयपुर: भारत में पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में, मिल्रिटी इंटेलीजेंस और राजस्थान पुलिस ने दो रक्षा कर्मियों को आईएसआई को रणनीतिक सैन्य प्रतिष्ठानों के बारे में जानकारी देने के आरोप में पकड़ा है. भारतीयों में से एक को सोशल मीडिया पर आईएसआई द्वारा ऑपरेट पाकिस्तानी महिला द्वारा हनीट्रैप किया गया था. Also Read - लेह अस्पताल में जहां जवानों से मिले पीएम मोदी उसको लेकर उठे सवाल, सेना ने की सबकी बोलती बंद

आधिकारिक सूत्रों ने कहा, राजस्थान पुलिस ने लखनऊ स्थित मिल्रिटी इंटेलीजेंस (एमआई) द्वारा दिए गए खुफिया इनपुट के आधार पर आर्मी अम्युनिशन डिपार्टमेंट के एक नागरिक सुरक्षा कर्मचारी विकास कुमार (29) और सेना के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज के एक संविदा कर्मचारी चिमन लाल (22) को गिरफ्तार किया. यह दोनों पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के जासूसों के रूप में काम कर रहे थे. Also Read - Pakistan Coronavirus latest Update: पाकिस्तान में कोरोनावायरस के 3,387 नए मामले सामने आए, संक्रमितों की संख्या 2 लाख 25 हजार से अधिक

श्री गंगानगर में अम्युनिशन डिपो और बीकानेर में एमएमएफआर दोनों ही रणनीतिक रूप से भारत के पश्चिमी क्षेत्र में महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान हैं. अगस्त 2019 में एमआई लखनऊ को ग्राहकों के माध्यम से जासूसी एजेंट विकास कुमार के बारे में पता चला था, जो पाकिस्तान में अपने संचालकों को सैन्य जानकारी दे रहा था. कुमार को मुल्तान की महिला पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (पीआईओ) ने फेसबुक के जरिए ट्रैप किया था. पीआईओ ने भारत की एक हिंदू महिला ‘अनुष्का चोपड़ा’ नाम से फेसबुक अकाउंट चला रही थी. Also Read - विराट कोहली ने शुरू किया वर्कआउट; खोला अपनी फिटनेस का राज

एमआई यूनिट ने यह पता लगाया है कि कुमार ओरबेट (ऑर्डर ऑफ बैटल, कंपोजिशन एंड ऑर्डर ऑफ अ मिलिटरी फाइटिंग फॉर्मेशन), गोला-बारूद (फोटो, राज्य, मात्रा, प्रकार, आगमन, प्रस्थान) से संबंधित सैन्य जानकारी दे रहा था. इसके अलावा फायरिंग अभ्यास/मिल्रिटी एक्सरसाइज के लिए आने वाली सैन्य इकाइयों के बारे में भी बताता था. इसके बदले उसने पैसे भी लिए. यह भी पाया गया कि कुमार को अपने तीन बैंक खातों और अपने भाई के बैंक खाते में भुगतान प्राप्त हो रहा था.

एमआई की लखनऊ इकाई ने जनवरी, 2020 में उत्तर प्रदेश के आतंकवाद-रोधी दस्ते के साथ यह मामला साझा किया, जिसके बाद कुमार को ‘डेजर्ट चेज’ नामक ऑपरेशन कोड के तहत दोनों कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से निगरानी और विश्लेषण किया गया.