नई दिल्लीः अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दो पूर्व सदस्यों ने जेएनयू राजद्रोह मामले में आरोप पत्र दायर किए जाने के समय को लेकर सवाल उठाते हुए इसे ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया है. एबीवीपी ने कहा है कि दोनों पूर्व सदस्य कांग्रेस के साथ हैं, जिसने आरोपी छात्रों का समर्थन किया था. उसने इसे ध्यान भटकाने की ‘राजनीतिक चाल’ करार दिया. Also Read - अपनी विचारधारा को प्राथमिकता देने की बात ने देश की लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था को बड़ा नुकसान पहुंचाया: मोदी

एबीवीपी की जेएनयू इकाई के तत्कालीन संयुक्त सचिव प्रदीप नरवाल और दो अन्य ने 9 फरवरी 2016 की घटना के बाद परिसर में हुई झड़प के उपरांत अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उस कार्यक्रम में कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगे थे. एबीवीपी की जेएनयू इकाई के उपाध्यक्ष जतिन गोराया ने अगस्त 2016 में पद से इस्तीफा दे दिया था. Also Read - JNUEE Result 2020: NTA आज किसी भी समय जारी कर सकता है JNUEE 2020 का रिजल्ट, ऐसे चेक करें अपना स्कोर

नरवाल ने बुधवार को आरोप पत्र को राजनीति से प्रेरित बताया. वहीं, गोराया ने कहा कि कथित राजद्रोह विवाद सुनियोजित था, ताकि दलित छात्र रोहित वेमुला की मौत से शुरू हुए आंदोलन को समाप्त किया जा सके. Also Read - JNU Reopening News: इस तारीख से खुलेगा जेएनयू, लेकिन केवल इन छात्रों को मिलेगी एंट्री

(इनपुट-भाषा)