नई दिल्ली। पाकिस्तान के साथ बेहतर मिलिटरी डिप्लोमैसी की वकालत करते हुए वेस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ ले. जनरल सुरिंदर सिंह ने कहा कि टू फ्रंट वार एक अच्छा विचार नहीं है. आर्मी चीफ बिपिन रावत ने जून 2017 में कहा था कि भारतीय सेना ढाई मोर्चे पर लड़ने को पूरी तरह तैयार है. पंजाब यूनिवर्सिटी में ‘पाकिस्तान में भू-रणनीतिक अभिव्यक्ति और भारत के लिए प्रभाव’ पर हुए सेमिनार के आखिरी दिन ले. जनरल सिंह ने कहा कि पाकिस्तान पर बढ़त हासिल करने के लिए भारत को चीन के साथ रिश्ते सुधारने चाहिए. Also Read - LAC पर ठंड से बेहाल चीनी सैनिक, मन बहलाने के लिए कर रहे हैं ये काम

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ले. जनरल सिंह ने कहा, इससे हमारी एक ओर की सीमा सुरक्षित हो जाएगी. लोग टू फ्रंट वॉर की बात करते रहते हैं. लेकिन ये एक अच्छा आइडिया नहीं है. दो मोर्चे पर लड़ना समझदारी की बात नहीं है. उन्होंने कहा, इसके अलावा भी बहुत विकल्प हैं. इसमें समझौतों पर दोबारा बातचीत का विकल्प भी शामिल है ताकि पाकिस्तान को दबाव में लाया जा सके. Also Read - खूबसूरत नर्स को Sex के लिए ब्लैकमेल करता था डॉक्टर, नर्स ने हत्या कर आग में पकाया शरीर

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उन्होंने कहा, पाकिस्तान में मिलिटरी ही असली ताकत है. इसलिए, आज नहीं तो कल हमें उनकी मिलिटरी से बात करनी ही होगी. मुझे लगता है कि हमारी तरफ से भी मिलिटरी डिप्लोमैसी बड़ी भूमिका अदा करती है. इसलिए, मिलिटरी डिप्लोमैसी का बड़ा रोल होना चाहिए ताकि दोनों देशों की मिलिटरी एक दूसरे में विश्वास पैदा कर सके और हम आगे बढ़ सकें. चीन का उदाहरण देते हुए ले. जनरल सिंह ने कहा कि रिश्ता संभाला जा सकता है. दोनों के बीच इस तरह की कोई दुश्मनी नहीं है. सीमा की सरहदबंदी को लेकर मतभेद जरूर हैं. मेरे विचार से इस पर काम किया जा सकता है.

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ले. जनरल सिंह के मुताबिक, अगर हम चीन के साथ रिश्ते सुधार सकें तो आने वाले समय में पाकिस्तान से फायदा उठा सकते हैं. चीन के साथ रिश्ते सुधारकर हम एक मोर्चे को सुरक्षित बना सकते हैं. उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान के परमाणु निवारण ने परंपरागत युद्ध की संभावना कम कर दी है. आप उन्हें परंपरागत रूप से एक सीमा तक ही हटा सकते हैं उससे ज्यादा नहीं. कोई भी परमाणु शक्ति संपन्न देश को एक हद से ज्यादा धमकाया नहीं जा सकता. पाकिस्तान के साथ परंपरागत युद्ध की संभावना पर उन्होंने कहा, कभी कभी परंपरागत लड़ाई होती ही नहीं क्योंकि आप बड़ा सैन्य उद्देश्य हासिल कर सकते हैं, लेकिन कई बार लोगों के विचारों की वजह से आपको युद्ध में उतरना पड़ जाता है.