इंदौर: बहुचर्चित घटनाक्रम में पाकिस्तान से साल 2015 में भारत लौटी मूक-बधिर युवती गीता को देश के अलग-अलग सूबों के दो और परिवारों ने अपनी लापता बेटी बताया है. इसके बाद उसके बिछड़े परिजनों का पता लगाने को लेकर पिछले तीन साल से जारी सरकारी हलचल फिर तेज हो गयी है. गीता, मध्यप्रदेश सरकार के सामाजिक न्याय और नि:शक्त कल्याण विभाग की देख-रेख में इंदौर की एक गैर सरकारी संस्था के आवासीय परिसर में रह रही है.

बता दें कि गीता गलती से सीमा लांघने के कारण दशक भर पहले पाकिस्तान पहुंच गई थी. स्वराज के विशेष प्रयासों के कारण वह 26 अक्टूबर 2015 को स्वदेश लौटी थी.

विभाग के संयुक्त संचालक बी. सी. जैन ने गुरुवार को बताया कि हाल ही में बिहार के दरभंगा जिले और राजस्थान के चुरू जिले के दो परिवारों ने उनसे संपर्क कर गीता पर वल्दियत का दावा किया है. बता दें अब तक देश के अलग-अलग इलाकों के 10 से ज्यादा परिवार गीता को अपनी लापता बेटी बता चुके हैं.

जैन ने बताया, “हमने दोनों परिवारों को सलाह दी है कि वे गीता की वल्दियत के संबंध में उचित सबूतों के साथ विदेश मंत्रालय को अपना दावा भेजें. अगर हमें विदेश मंत्रालय से अनुमति मिलती है, तो हम इन परिवारों को गीता से मिलवा देंगे, ताकि उनके दावों को परखा जा सके.”

बता दें अब तक देश के अलग-अलग इलाकों के 10 से ज्यादा परिवार गीता को अपनी लापता बेटी बता चुके हैं. लेकिन सरकार की जांच में इनमें से किसी भी परिवार का दावा फिलहाल साबित नहीं हो सका है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गत 20 नवंबर को यहां मीडिया से बातचीत के दौरान गीता को “हिंदुस्तान की बेटी” बताते हुए स्पष्ट किया था कि देश में उसके परिवारवाले मिलें या न मिलें, वह दोबारा पाकिस्तान कभी नहीं भेजी जाएगी. उसकी देखभाल भारत सरकार ही करेगी.

इसके अगले ही दिन उसे इंदौर में मूक-बधिरों के लिए चलाई जा रही गैर सरकारी संस्था के आवासीय परिसर में भेज दिया गया था. तब से वह इसी परिसर में रह रही है.