नई दिल्ली: मोदी सरकार के लिए नाक का सवाल बन चुकी है नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) राज्य सभा (Rajya Sabha) में अटक सकती है. एक दिन पहले ही लोकसभा में विधेयक को पास किए जाने के बाद इसे राज्य सभा में पेश किया जाना है. इस बीच एनडीए की पूर्व सहयोगी शिवसेना (Shiv Sena) ने अपना पाला बदल लिया है. शिवसेना ने कहा है कि वह तब तक नागरिकता बिल को समर्थन नहीं देगी जब तक कि सभी पहलुओं को साफ नहीं कर दिया जाता. गौरतलब है कि राज्य सभा में भाजपा (BJP) के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है. ऐसे में नागरिकता विधेयक को पास कराने के लिए भाजपा को अन्य पार्टियों की जरूरत पड़ेगी.

बता दें कि नागरिकता बिल को लेकर शिवसेना प्रमुख व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने बयान दिया है. अपने बयान में उन्होंने कहा- नागरिकता संशोधन विधेयक का अगर कोई विरोध कर रहा है तो वह देशद्रोही है, यह उनका (भाजपा) का भ्रम है. हमने राज्यसभा में बिल को लेकर बदलाव का सुझाव दिया है. यह भ्रम है कि केवल भाजपा ही देश की परवाह करती है. उद्धव ने आगे कहा- अगर किसी नागरिक को इस विधेयक से डर लगता है तो सरकार को उनके डर को खत्म करना चाहिए और सभी पहलुओं को साफ करना चाहिए. वे हमारे नागरिक हैं और उन्हें जवाब देना चाहिए. साथ ही ठाकरे ने यह भी कहा कि हम तक तक विधेयक का समर्थन नहीं करेंगे जब तक चाजें स्पष्ट नहीं हो जाती. शरणार्थी कहां रहेंगे इस मामले पर राज्यसभा में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए.

एक तरफ जहां शिवसेना का रुख बदला-बदला है वहीं भाजपा की सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) में भी दरार आ चुकी है. जदयू दो धड़ों में बट चुकी है. एक पक्ष बिल का समर्थन कर रहा है. वहीं दूसरा पक्ष बिल के खिलाफ है और इसे असंवैधानिक बता रहा है. पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन के वर्मा (Pavan K Varma) ने ट्वीट कर नीतीश कुमार (Nitih Kumar) से विधेयक के समर्थन पर पुनर्विचार करने को कहा है. वहीं पार्टी के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर (Prashant kishor) ने अपना निराशा व्यक्त की है. किशोर ने कहा है कि यह विधेयक पार्टी के संविधान के खिलाफ है. वहीं वर्मा ने कहा कि यह विधेयक जदयू के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के खिलाफ होने के अलावा असंवैधानिक, भेदभावपूर्ण, देश की एकता और सद्भाव के खिलाफ है. गांधी जी ने इसका कड़ा विरोध किया था.