नई दिल्ली| आधार जारी करने वाले भारत विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने एयरटेल जैसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए बैंकों को निर्देश दिया है कि सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी के लिए बैंक खाते में बदलाव ग्राहक की सहमति के बिना नहीं किया जा सकता. यूआईडीएआई की गजट अधिसूचना में कहा गया है कि बैंकों को इस बदलाव के बारे में 24 घंटे के अंदर एसएमएस या ई-मेल से ग्राहक को इसकी सूचना देनी होगी. इसके अलावा उसे संबंधित व्यक्ति को इस बदलाव को पलटने का भी विकल्प देना होगा.

यह अधिसूचना सरकार की ओर से दिए जाने वाले अनुदान, विशेषरूप से एलपीजी सब्सिडी लाभार्थियों के उन खातों में पहुंचने के बाद जारी की गई जो आधार संख्या का इस्तेमाल कर सबसे बाद में खोले गए हैं. भारती एयरटेल के मामले में तो स्थिति और भी खराब है, जिसने अपने मोबाइल ग्राहकों का उनकी सहमति के बिना एयरटेल पेमेंट्स बैंक में खाता खोला और उनकी एलपीजी सब्सिडी इसी खाते में पहुंचने लगी. इन ग्राहकों ने आधार का इस्तेमाल एयरटेल के अपने सिम के सत्यापन के लिए किया था.

सरकार ने सभी बैंक खातों तथा सिम के लिए 12 अंक की बायोमीट्रिक पहचान संख्या आधार से सत्यापन अनिवार्य कर दिया है. करीब 190 करोड़ रुपये की एलपीजी सब्सिडी एयरटेल पेमेंट्स बैंक के उन खातों में पहुंच गई, जो ग्राहकों की विधिवत सहमति के बिना खोले गए थे.

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अधिसूचना में कहा गया है कि नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन आफ इंडिया (एनपीसीआई) सिर्फ उसी स्थिति में सब्सिडी वाले बैंक खातों को बदलने की अनुमति दे जबकि उसके साथ लाभार्थी के मौजूदा बैंक का ब्योरा हो और बदलाव के लिए उसकी सहमति हो. अधिसूचना में कहा गया है कि जब तक यह प्रावधान लागू नहीं हो जाता, एनपीसीआई अपने साफ्टवेयर में ‘सब्सिडी के खाते में बदलाव वाले ओवरराइड फीचर को हटाएगा.

इस बारे में संपर्क करने पर यूआईडीएआई के सीईओ अजय भूषण पांडे ने कहा कि ग्राहक की विधिवत सहमति के बिना बैंक खातों में बदलाव को प्रभावी तरीके से रोकने के लिए एक सुरक्षित प्रक्रिया तैयार की गई है.