मुंबई: बांग्लादेश के उच्चायुक्त सैयद मुअज्जम अली ने मंगलवार को कहा कि रोहिंग्या संकट का समाधान भारत और बांग्लादेश दोनों के हित में होगा क्योंकि क्षेत्र में हजारों बेरोजगार शरणार्थियों की मौजूदगी भारत के लिए भी उतना ही खतरा हो सकती है जितना उनके देश के लिए है. अली ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘हम यह देखना चाहेंगे कि भारत शरणार्थी संकट के समाधान में एक बड़ी भूमिका निभाए’’Also Read - India vs England, 5th Test: खुशखबरी! साल 2022 में इस मैदान पर खेला जाएगा भारत-इंग्लैंड के बीच 5वां टेस्ट

उन्होंने कहा, ‘‘यह आज हमारी समस्या है, कल यह आपकी समस्या भी हो सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि यदि हम अपने क्षेत्र में रोहिंग्या शरणार्थियों को बेरोजगार रखेंगे तो वह आपके लिए भी एक खतरा होगा.’’ Also Read - कौन हैं स्नेहा दुबे? UNGA में इमरान खान को जमकर लगाई फटकार, दुनिया के सामने खोलकर रख दी पाकिस्तान की पोल

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों का प्रवेश का मामला यह नहीं है कि यह वैध है या अवैध. उन्होंने कहा, ‘‘लोगों के एक समूह को उनके देश से बाहर कर दिया गया और उन्हें अपने जीवन के लिए हमारे देश में शरण लेनी पड़ी है.’’ उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने रोहिंग्या को देश में आने देकर अधिकतम उदारता दिखाई है. Also Read - UNGC में भारत ने पाक के कश्‍मीर राग अलापने और गिलानी को शहीद को बताने पर किया पलटवार

कौन हैं रोहिंग्या मुसलमान

रोहिंग्या मुसलमान खुद को अरब और फारसी व्यापारियों का वंशज बताते हैं. म्यांमार में करीब 11 लाख रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं जो रोहिंग्या भाषा में बात करते हैं. ये भाषा बांग्लादेश की बांग्ला से काफी मिलती-जुलती है. रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार के स्थानीय बौद्ध बहुसंख्यक समुदाय ने आज तक नहीं अपनाया है. ऐसा भी कहा जाता है कि वे मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं. म्यांमार की सरकार ने इन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया है. हालांकि ये म्यांमार में पीढ़ियों से रह रहे हैं. बड़ी तादाद में रोहिंग्या मुसलमान आज भी जर्जर कैंपो में रह रहे हैं.

कैसे शुरू हुआ पलायन?

साल 1982 में म्यांमार सरकार ने राष्ट्रीयता कानून बनाया. इस कानून में रोहिंग्या मुसलमानों का नागरिक दर्जा खत्म कर दिया गया. तभी से म्यांमार सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को देश छोड़ने के लिए मजबूर करती आ रही है. 1982 के बाद से ही रोहिंग्या मुसलमान वहां से लगातार पलायन कर रहे हैं. सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं. ऐसे प्रतिबंधों में आवागमन, मेडिकल सुविधा, शिक्षा और अन्य सुविधाएं शामिल हैं. रोहिंग्या के मुसलमान म्यांमार सरकार पर भेदभाव और दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हैं.