(डीआरडीओ के सीनियर साइंटिस्ट मंजीत सिंह)

(डीआरडीओ के सीनियर साइंटिस्ट मंजीत सिंह)

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ( डीआरडीओ ) के एक सीनियर साइंटिस्ट ने भारत न्यूक्लियर टेस्ट से जुड़ी कुछ बातों का खुलासा किया है. उन्होंने बताया कहा कि हवा की उल्टे रुख के के कारण 11 मई 1998 को किए गए पोकरण परमाणु परीक्षण में 6 घंटे से ज्यादा की देरी हुई थी. अगर यह देरी नहीं की जाती तो पाकिस्तान के कुछ इलाके को नुकसान हो सकता था. परमाणु परीक्षण में कुछ घंटों की देरी करने का फैसला हवा के विकिरण को रिहाइशी इलाकों या पाकिस्तान की ओर ले जाने की आशंका को ध्यान में रखते हुए लिया गया था. Also Read - Honey Trap में फंसाकर DRDO के वैज्ञानिक को बनाया बंधक, घरवालों से मांगी 10 लाख की फिरौती

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परीक्षण टीम का हिस्सा रहे मंजीत सिंह ने सोमवार को यहां डीआरडीओ के एक कार्यक्रम में कहा ,”वास्तविक योजना सभी तीन उपकरणों का सुबह नौ बजे परीक्षण करने की थी लेकिन हवा की प्रतिकूल दिशा के कारण पूरे कार्यक्रम में देरी हुई.” Also Read - On anniversary of Pokhran nuclear tests, PM Modi hails Vajpayee's courage | पोखरण में आज ही के दिन दुनिया को चौंकाया था भारत ने, मोदी ने अटल को किया सलाम

सीनियर साइंटिस्ट ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों के प्रोटोकॉल के मुताबिक हवा की दिशा अन्य देशों या रिहाइशी इलाकों की ओर नहीं होनी चाहिए. ऐसे में हवा की दिशा बदल जाए , इसके लिए हमने करीब छह घंटे तक इंतजार किया.” वैज्ञानिक ने कहा कि परीक्षण टीम नियंत्रण कक्ष में इंतजार करना नहीं चाहती थी, क्योंकि उसे डर था कि विस्फोट से पैदा होने वाले झटकों के कारण वह ढह जाएगा.

मंजीत सिंह ने दिसंबर, 1984 में डीआरडीओ के टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लैबोरेट्री (टीबीआरएल ) में कनिष्ठ वैज्ञानिक का पद संभाला था. उन्हें 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें पुरस्कार दिया था। सिंह ने 29 जुलाई , 2011 को टीबीआरएल के निदेशक का पद संभाला था.

बता दें कि पोकरण परीक्षण के बाद भारत ने परमाणु शक्ति बनने की घोषणा कर दी थी. (इनपुट- एजेंसी)