लॉ कमीशन के चेयरमैन बलबीर सिंह चौहान ने कहा है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लागू करना संभव नहीं है. न्यूज 18 से बातचीत में चौधरी ने कहा कि इसे लागू करना किसी भी तरह मुमकिन नहीं है और ये कोई विकल्प भी नहीं. उन्होंने कहा कि पर्सनल लॉ में बदलाव इसलिए भी मुमकिन हीं क्योंकि इसे संवैधानिक सुरक्षा मिली हुई है. 

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समान नागरिक संहिता लागू करने का विचार छोड़ते हुए लॉ कमीशन अब पर्सनल लॉ कानून में संशोधनों पर सुझाव देने पर काम कर रहा है. जस्टिस चौहान ने कहा कि इसे लागू करना मुमकिन नहीं है. हम कोशिश करेंगे कि धार्मिक रूप से पारिवारिक कानूनों में बदलावों पर सुझाव दें.

उन्होंने कहा, शांतिपूर्ण तरीका ये होगा कि हम हिंदू कानून, मुस्लिम कानून, ईसाई कानून, पारसी कानून में क्या क्या बदलाव संभव हो सकते हैं. हम हर कानून की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे और उसी के अनुसार चीजें तय करेंगे. हम पूरे समान नागरिक संहिता को नहीं ले सकते और संविधान के दायरे से बाहर नहीं जा सकते. 

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लॉ कमीशन के प्रमुख ने कहा कि इसमें दी गई संवैधानिक छूट का सम्मान होना चाहिए, समान नागरिक संहिता संविधान की भावना को प्रभावित कर सकता है. संविधान ने कई लोगों को छूट दी हुई है जैसे कि आदिवासियों को. यहां तक कि सिविल प्रोसीजर कोड और क्रिमिनल प्रोसीजर कोड में भी छूट दी है. यूसीसी समस्या का समाधान नहीं है. आप ये नहीं कह सकते कि संविधान को भूल जाइए और छठे अनुच्छेद के साथ आगे बढ़ें.