किसान आन्दोलन: कृषि मंत्री की दो टूक- हमारे प्रस्ताव पर फिर से विचार करें किसान, इससे बेहतर नहीं कर सकते

बता दें कि सरकार और किसानों की वार्ता को लेकर अगली बैठक के लिए कोई तारीख तय नहीं हुई है.

Published: January 22, 2021 6:45 PM IST

By India.com Hindi News Desk | Edited by Amit Kumar

किसान आन्दोलन: कृषि मंत्री की दो टूक- हमारे प्रस्ताव पर फिर से विचार करें किसान, इससे बेहतर नहीं कर सकते
Union Minister Narendra Singh Tomar

Kisan Andolan: सरकार और आंदोलनकारी किसानों के बीच शुक्रवार को हुई 11वें दौर की वार्ता समाप्त हो गई है, लेकिन इसमें भी मुद्दे का कोई समाधान नहीं निकल पाया. किसान यूनियनों के साथ 11वें दौर की वार्ता के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, “भारत सरकार PM मोदी जी के नेतृत्व में किसानों और गरीबों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है और रहेगी… विशेष रूप से पंजाब के किसान और कुछ राज्यों के किसान कृषि क़ानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं.”

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कृषि मंत्री ने किसान आन्दोलन पर निशाना साधते हुए कहा कि इस आंदोलन के दौरान लगातार ये कोशिश हुई कि जनता के बीच और किसानों के बीच गलतफहमियां फैलें. इसका फायदा उठाकर कुछ लोग जो हर अच्छे काम का विरोध करने के आदि हो चुके हैं, वे किसानों के कंधे का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर सकें.

बता दें कि सरकार और किसानों की वार्ता को लेकर अगली बैठक के लिए कोई तारीख तय नहीं हुई है.

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, “भारत सरकार की कोशिश थी कि वो सही रास्ते पर विचार करें जिसके लिए 11 दौर की वार्ता की गई. परन्तु किसान यूनियन क़ानून वापसी पर अड़ी रही. सरकार ने एक के बाद एक प्रस्ताव दिए. परन्तु जब आंदोलन की पवित्रता नष्ट हो जाती है तो निर्णय नहीं होता.” उन्होंने कहा, “वार्ता के दौर में मर्यादाओं का तो पालन हुआ परन्तु किसानों के हक में वार्ता का मार्ग प्रशस्त हो, इस भाव का सदा अभाव था इसलिए वार्ता निर्णय तक नहीं पहुंच सकी. इसका मुझे भी खेद है.”

किसान संगठनों के साथ 11वें दौर के वार्ता असफल होने के बाद तोमर संवाददाताओं को संबोधित कर रहे थे. तोमर ने कहा कि कुछ ‘‘ताकतें’’ हैं जो अपने निजी और राजनीतिक हितों के चलते आंदोलन को जारी रखना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि अगर किसान का हित सर्वोपरि नहीं है और दूसरे हित सर्वोपरि हो जाएंगे तो किसान के हित में निर्णय नहीं हो पाएगा.

कृषि मंत्री ने कहा, “हमने किसान यूनियन को कहा कि जो प्रस्ताव आपको दिया है- 1 से 1.5 वर्ष तक कानून को स्थगित करके समिति बनाकर आंदोलन में उठाए गए मुद्दों पर विचार करने का प्रस्ताव बेहतर है, उसपर फिर से विचार करें.” कृषि मंत्री तोमर ने कहा, “हमने कहा कि आज वार्ता को पूरा करते हैं आप लोग अगर निर्णय पर पहुंच सकते हैं तो आप लोग कल अपना मत बताइए. निर्णय घोषित करने पर आपकी सूचना पर हम कहीं भी इकट्ठा हो सकते हैं.”

सरकार ने आज अपने रुख में कड़ाई लाते हुए कहा कि यदि किसान यूनियन कानूनों को निलंबित किए जाने संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सहमत हो तो वह दुबारा बैठक करने के लिए तैयार है. इसके साथ ही किसान संगठनों ने कहा कि वे अब अपना आंदोलन तेज करेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान सरकार का रवैया ठीक नहीं था.

केंद्र ने पिछले दौर की वार्ता में कानूनों को निलंबित रखने तथा समाधान ढूंढ़ने के लिए एक संयुक्त समिति बनाने की पेशकश की थी. किसान नेताओं ने आज की बैठक के बाद कहा कि भले ही बैठक पांच घंटे चली, लेकिन दोनों पक्ष मुश्किल से 30 मिनट के लिए ही आमने-सामने बैठे.

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Published Date: January 22, 2021 6:45 PM IST