नई दिल्ली: कांग्रेस ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शुक्रवार को पेश बजट को ‘‘नयी बोतल में पुरानी शराब’’ करार देते हुए दावा किया कि इस ‘नीरस बजट’ में कुछ भी नया नहीं है और सिर्फ पुराने वादों को दोहराया गया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने यह भी कहा कि नयी मोदी सरकार के पहले आम बजट से समाज के किसी भी वर्ग को उचित राहत नहीं मिली है और साथ ही कर का बोझ भी बढ़ा दिया गया. Also Read - केंद्र ने ब्लैक फंगस की दवा पर टैक्स हटाया, वित्त मंत्री सीतारमण बोलीं- कोविड टीकों पर 5% GST जारी रहेगी

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चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा कि बजट 2019-20 एक नीरस बजट है. वित्त मंत्री का भाषण अपारदर्शी प्रयास था. उन्होंने कहा कि क्या कभी कोई ऐसा बजट आया है जिसमें कुल राजस्व, कुल ख़र्च, वित्तीय घाटे, राजस्व घाटे और वित्तीय रियायतों का उल्लेख नहीं है? हम अब तक चली आ रही परंपराओं से इस सरकार के अलग जाने से स्तब्ध हैं. चिदंबरम ने कहा कि आम नागरिकों या जानकार अर्थशास्त्रियों की आवाज को सुने बिना यह बजट तैयार किया गया. यह बजट आर्थिक समीक्षा से पैदा हुई मामूली उम्मीदों के मुताबिक नहीं है.’ उन्होंने दावा किया, ‘वित्त मंत्री ने किसी भी वर्ग को उचित राहत नहीं पहुंचाई है. इसके उलट उन्होंने कई वस्तुओं और पेट्रोल एवं डीजल पर कर का बोझ बढ़ा दिया.’ लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘इसमें कुछ भी नया नहीं है. पुरानी बातों को ही दोहराया गया है. यह नयी बोतल में पुरानी शराब है.

उन्होंने कहा कि वे न्यू इंडिया की बात कर रहे हैं, जबकि कोई नयी पहल नहीं की गई है. पेट्रोल और डीजल पर उप कर लगा दिया गया. वे एक ऐसे भारत को पेश कर रहे हैं जो सबके लिए हसीन ख्वाब जैसा है, लेकिन हकीकत में कृषि और अर्थव्यवस्था तथा दूसरे क्षेत्रों को लेकर जो पहले वादे किए गए थे उसमें कुछ नया नहीं किया गया. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा ने कहा कि इस बजट में आम आदमी के लिए कुछ नहीं है. कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा कि बजट में शामिल नारों और जुमलों पर लोकसभा में खूब ‘वाह वाह’ हो रही थी. हकीकत यह है कि बजट में न तो नये भारत के निर्माण के बारे में कुछ है, ना ही आम आदमी के साथ किसी तरह के न्याय की झलक दिखती है.

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि गाँव,ग़रीब व किसान’ हाशिये पर. क्या थोथे शब्दों से कृषि संकट का हल होगा? न किसान की आय दुगनी करने का रास्ता, न न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी) का वादा, अकाल-सूखे से लड़ने का कोई उपाय, न ग्रामीण अर्थव्यवस्था में संकट का सुधार. केवल डीज़ल पर दो रुपये का अतिरिक्त भार. गौरतलब है कि ‘गांव, गरीब और किसान’ तथा प्रत्येक नागरिक के जीवन को ‘‘अधिक सरल’’ बनाने के लक्ष्य के साथ पेश किए गये नरेन्द्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले आम बजट में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए मीडिया, विमानन, बीमा और एकल ब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों को उदार करने का प्रस्ताव किया गया है.

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बजट में बुनियादी आर्थिक और सामाजिक ढांचा के विस्तार, पेंशन और बीमा योजनाओं को आम लोगों की पहुंच के दायरे में ले जाने के विभिन्न प्रस्ताव किए गए हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शुक्रवार को लोकसभा में पेश किए गए वित्त वर्ष 2019-20 के अपने बजट भाषण में कहा कि हालिया चुनाव में एक आकर्षक और मजबूत भारत की उम्मीदें लहरा रही थीं और लोगों ने एक ऐसी सरकार को चुना जिसने काम कर के दिखाया.