Budget 2023: डिंपल यादव ने बजट को बताया निराशाजनक, कहा- 'इसे सिर्फ चुनाव को ध्यान में रखकर ही...' जानें क्या बोलीं मायावती...

Union Budget 2023: समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव (Dimple Yadav) ने कहा कि यह बजट बेहद निराशाजनक है. उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों के एमएसपी, और युवाकों के रोजगार को लेकर कुछ नहीं कहा.

Published date india.com Published: February 1, 2023 2:38 PM IST
Budget 2023: डिंपल यादव ने बजट को बताया निराशाजनक, कहा- 'इसे सिर्फ चुनाव को ध्यान में रखकर ही...' जानें क्या बोलीं मायावती...

Budget Reactions: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) की तरफ से बजट पेश किये जाने के बाद बयानबाजी का दौर भी शुरू हो गया. बीजेपी नेताओं और मंत्रियों ने बजट को समावेशी बताया. वहीं, समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party On Budget 2023) ने इसकी आलोचना की. समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव (Dimple Yadav) ने कहा कि यह बजट बेहद निराशाजनक है.

डिंपल यादव (Dimple Yadav) ने न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा, ‘यह चुनाव को ध्यान में रखकर पेश किया गया बजट है. सरकार ने किसानों के एमएसपी, और युवाकों के रोजगार को लेकर कुछ नहीं कहा. इस बजट में रेलवे की भी अनदेखी की गई. यह निराशाजनक बजट रहा है.

उधर, बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती (Mayawati) ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि लोग उम्मीदों के सहारे जीते हैं, लेकिन झूठी उम्मीदें क्यों? उन्होंने कहा कि बजट पार्टी से ज्यादा देश के लिए हो तो बेहतर होता है, क्योंकि देश के 130 करोड़ गरीब, मजदूर, वंचित और किसान अपने अमृतकाल को तरस रहे हैं. उन्होंने कहा कि पिछले 9 वर्षो में भी केंद्र सरकार के बजट आते-जाते रहे, जिसमें घोषणाओं, वादों, दावों व उम्मीदों की बरसात की जाती रही लेकिन मध्यम वर्ग महंगाई व बेरोजगारी के कारण निम्न मध्यम वर्ग बन गया हैं.

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बजट के बाद मायावती ने ट्वीट कर कहा, ‘केंद्र सरकार जब भी योजना लाभार्थियों के आँकड़ों की बात करे तो उसे यह जरूर याद रखना चाहिए कि भारत लगभग 130 करोड़ गरीबों, मजदूरों, वंचितों, किसानों आदि का विशाल देश है जो अपने अमृतकाल को तरस रहे हैं. उनके लिए बातें ज्यादा हैं. बजट पार्टी से ज्यादा देश के लिए हो तो बेहतर.’

उन्होंने कहा, ‘देश में पहले की तरह पिछले 9 वर्षों में भी केंद्र सरकार के बजट आते-जाते रहे जिसमें घोषणाओं, वादों, दावों व उम्मीदों की बरसात की जाती रही, किन्तु वे सब बेमानी हो गए जब भारत का मिडिल क्लास महंगाई, गरीबी व बेरोजगारी आदि की मार के कारण निम्न मिडिल क्लास बन गया, अति-दुखद.’ मायावती ने कहा, ‘इस वर्ष का बजट भी कोई ज्यादा अलग नहीं. पिछले साल की कमियां कोई सरकार नहीं बताती और नए वादों की फिर से झड़ी लगा देती है, जबकि जमीनी हकीकत में 100 करोड़ से अधिक जनता का जीवन वैसे ही दांव पर लगा रहता है जैसे पहले था. लोग उम्मीदों के सहारे जीते हैं, लेकिन झूठी उम्मीदें क्यों?’

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