
Parinay Kumar
परिणय कुमार को पत्रकारिता में लगभग 14 साल का अनुभव है. वह करियर की शुरुआत से ही पॉलिटिकल और स्पोर्ट्स की खबरें लिखते रहे हैं. 2008 में बिहार के ललित ... और पढ़ें
Budget Reactions: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) की तरफ से बजट पेश किये जाने के बाद बयानबाजी का दौर भी शुरू हो गया. बीजेपी नेताओं और मंत्रियों ने बजट को समावेशी बताया. वहीं, समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party On Budget 2023) ने इसकी आलोचना की. समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव (Dimple Yadav) ने कहा कि यह बजट बेहद निराशाजनक है.
It’s a #Budget presented keeping the elections in mind, while some relaxations given to the middle class. Govt hasn’t said anything about MSP for farmers, employment & youth. Railways also ignored in this budget. It has been a disappointing budget:Dimple Yadav, Samajwadi Party MP pic.twitter.com/Rxmc3r2o1d
— ANI (@ANI) February 1, 2023
डिंपल यादव (Dimple Yadav) ने न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा, ‘यह चुनाव को ध्यान में रखकर पेश किया गया बजट है. सरकार ने किसानों के एमएसपी, और युवाकों के रोजगार को लेकर कुछ नहीं कहा. इस बजट में रेलवे की भी अनदेखी की गई. यह निराशाजनक बजट रहा है.
2. इस वर्ष का बजट भी कोई ज्यादा अलग नहीं। पिछले साल की कमियाँ कोई सरकार नहीं बताती और नए वादों की फिर से झड़ी लगा देती है जबकि जमीनी हकीकत में 100 करोड़ से अधिक जनता का जीवन वैसेे ही दाव पर लगा रहता है जैसे पहले था। लोग उम्मीदों के सहारे जीते हैं, लेकिन झूठी उम्मीदें क्यों? 2/4
— Mayawati (@Mayawati) February 1, 2023
उधर, बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती (Mayawati) ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि लोग उम्मीदों के सहारे जीते हैं, लेकिन झूठी उम्मीदें क्यों? उन्होंने कहा कि बजट पार्टी से ज्यादा देश के लिए हो तो बेहतर होता है, क्योंकि देश के 130 करोड़ गरीब, मजदूर, वंचित और किसान अपने अमृतकाल को तरस रहे हैं. उन्होंने कहा कि पिछले 9 वर्षो में भी केंद्र सरकार के बजट आते-जाते रहे, जिसमें घोषणाओं, वादों, दावों व उम्मीदों की बरसात की जाती रही लेकिन मध्यम वर्ग महंगाई व बेरोजगारी के कारण निम्न मध्यम वर्ग बन गया हैं.
3. सरकार की संकीर्ण नीतियों व गलत सोच का सर्वाधिक दुष्प्रभाव उन करोड़ों गरीबों किसानों व अन्य मेहनतकश लोगों के जीवन पर पड़ता है जो ग्रामीण भारत से जुड़े हैं और असली भारत कहलाते हैं। सरकार उनके आत्म-सम्मान व आत्मनिर्भरता पर ध्यान दे ताकि आमजन की जेब भरे व देश विकसित हो। 3/4
— Mayawati (@Mayawati) February 1, 2023
बजट के बाद मायावती ने ट्वीट कर कहा, ‘केंद्र सरकार जब भी योजना लाभार्थियों के आँकड़ों की बात करे तो उसे यह जरूर याद रखना चाहिए कि भारत लगभग 130 करोड़ गरीबों, मजदूरों, वंचितों, किसानों आदि का विशाल देश है जो अपने अमृतकाल को तरस रहे हैं. उनके लिए बातें ज्यादा हैं. बजट पार्टी से ज्यादा देश के लिए हो तो बेहतर.’
उन्होंने कहा, ‘देश में पहले की तरह पिछले 9 वर्षों में भी केंद्र सरकार के बजट आते-जाते रहे जिसमें घोषणाओं, वादों, दावों व उम्मीदों की बरसात की जाती रही, किन्तु वे सब बेमानी हो गए जब भारत का मिडिल क्लास महंगाई, गरीबी व बेरोजगारी आदि की मार के कारण निम्न मिडिल क्लास बन गया, अति-दुखद.’ मायावती ने कहा, ‘इस वर्ष का बजट भी कोई ज्यादा अलग नहीं. पिछले साल की कमियां कोई सरकार नहीं बताती और नए वादों की फिर से झड़ी लगा देती है, जबकि जमीनी हकीकत में 100 करोड़ से अधिक जनता का जीवन वैसे ही दांव पर लगा रहता है जैसे पहले था. लोग उम्मीदों के सहारे जीते हैं, लेकिन झूठी उम्मीदें क्यों?’
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