Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी. ऐसा करने वाली वह पहली वित्तमंत्री हैं. निर्मला सीतारमण देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री भी हैं. उनसे पहले इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए 1970 में बजट पेश किया था. तब वित्तमंत्री मोरारजी देसाई के इस्तीफा देने के कारण ऐसी स्थिति बनी थी. निर्मला सीतारमण ने बतौर वित्तमंत्री 2019 में पद संभाला था. यह मोदी सरकार का 15वां बजट है.
बतौर वित्तमंत्री मोरारजी देसाई ने 10 बार बजट पेश किया था. पी चिदंबरम ने नौ बार बजट पेश किया था. हालांकि इन दोनों नेताओं में से किसी ने भी निर्मला सीतारमण की तरह लगातार 9 बार बजट पेश नहीं किया. 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार 9वीं बार बजट पेश कर रही हैं. निर्मला सीतारमण देश में सबसे लंबा बजट भाषण देने वाली वित्तमंत्री भी हैं. साल 2020 में उन्होंने 2 घंटे से ज्यादा का बजट भाषण दिया था.
आज पेश किया जाना वाला बजट खास होगा क्योंकि इतिहास में पहली बार इसे रविवार के दिन पेश किया जा रहा है. माना जा रहा है कि इस बार बजट में रक्षा, बुनियादी ढांचा, पूंजीगत खर्च (कैपेक्स), बिजली क्षेत्र और किफायती आवास (अफोर्डेबल हाउसिंग) के विकास पर खास ध्यान दिया जाएगा. ऑपरेशन सिंदूर के बाद ये देश का पहला बजट है और अनुमान है कि रक्षा बजट में इजाफा हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में उन तात्कालिक चुनौतियों को भी ध्यान में रखा जाएगा जो बदलते वैश्विक और भू-राजनीतिक हालात से पैदा हो रही हैं.
बजट पेश होने से पहले देश के लिए एक खुशखबरी भी आई है. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 23 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में 8.053 अरब डॉलर बढ़कर ऑल टाइम हाई 709.413 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से शुक्रवार को जारी किए गए डेटा में दी गई. इससे पहले विदेशी मुद्रा भंडार का ऑल-टाइम हाई 704.89 अरब डॉलर था जो कि सितंबर 2024 में देखा गया था.
बजट से पहले एचएसबीसी की रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार हाल के महीनों में शुरू किए गए सुधारों के क्रम को आने वाले बजट में जारी रखेगी. रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार इस बजट में दो चीजों पर फोकस करेगी जिसमें पहला- राजकोषीय नियंत्रण और दूसरा- सुधार है. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि सरकार वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने सकल घरेलू उत्पाद के 4.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा कर लेगी. कर दरों में कटौती के कारण राजस्व में आई गिरावट की भरपाई संभवतः आरबीआई और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के मजबूत लाभांश से और आंशिक रूप से चालू व्यय में कमी से हो जाएगी.
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