मोदी सरकार का बड़ा फैसला, यूनियन कैबिनेट ने 1,60,504 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी दी, जानिए कहां क्या बनेगा

कैबिनेट ने जिन परियोजनाओं को मंजूरी दी है उनमें एक बड़ा हिस्सा ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए है. इसका मकसद कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी और रीजनल डेवलपमेंट को बढ़ाना है.

Published date india.com Published: February 14, 2026 2:12 PM IST
(प्रतीकात्मक AI इमेज)
(प्रतीकात्मक AI इमेज)

Infra boost: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि यूनियन कैबिनेट ने रेलवे, सड़क, टनल और मेट्रो से जुड़े कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कैबिनेट में 1 लाख 60 हजार करोड़ रुपये के फैसले लिए गए. इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, अर्बन चैलेंज फंड, स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 शामिल हैं. कैबिनेट ने जिन परियोजनाओं को मंजूरी दी है उनमें एक बड़ा हिस्सा ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए है. इसका मकसद कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी और रीजनल डेवलपमेंट को बढ़ाना है.

इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली

रेल प्रोजेक्ट्स में कैबिनेट ने 10,154 करोड़ रुपये की कसारा-मनमाड तीसरी और चौथी लाइन परियोजना, 5,983 करोड़ रुपये की दिल्ली-अंबाला तीसरी और चौथी लाइन परियोजना और 2,372 करोड़ रुपये की बल्लारी-होसपेट तीसरी और चौथी लाइन परियोजना को मंजूरी दी है. इन प्रोजेक्ट्स से मालवाहक और पैसेंजर कॉरिडोर पर भीड़ कम होगी.

कैबिनेट ने एक बड़े स्ट्रेटेजिक कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है. गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच अंडरवाटर रोड टनल बनाया जाएगा जिसका खर्च 18,662 करोड़ रुपये है. इसका मकसद नॉर्थईस्ट में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है. इसके अलावा…

गुडेबेलूर-महबूबनगर सेक्शन को 3,175 करोड़ की लागत से फोर-लेन किया जाएगा.

धमसिया-बिटाडा और नासरपोर-मलोथा सेक्शन को 4,584 करोड़ की लागत से फोर लेन किया जाएगा.

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घोटी-त्र्यंबक-पालघर सेक्शन का अपग्रेडेशन 3,320 करोड़ की लागत से किया जाएगा.

नोएडा मेट्रो एक्वा लाइन एक्सटेंशन को भी मंजूरी मिल गई है. इसमें 2,254 करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट शामिल है.

महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं के अलावा कैबिनेट ने शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप इकोसिस्टम को सपोर्ट देने के लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग को भी मंजूरी दी है. इससे जुड़ा सबसे बड़ा फैसला अर्बन चैलेंज फंड है जिस पर 1,00,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. इस योजना का मकसद शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और शहर-स्तर के डेवलपमेंट की कोशिशों को बढ़ावा देना है.

कैबिनेट ने शुरुआती स्टेज के स्टार्टअप और डीप-टेक इनोवेशन को सपोर्ट करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के कॉर्पस के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को भी मंजूरी दे दी है. कैबिनेट के फैसलों में कुल 1,60,504 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च शामिल है.

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