नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है. इस विधेयक में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से शरणार्थी के तौर पर आए उन गैर मुसलमानों को नागरिकता प्रदान करने की बात कही गई है, जिन्हें धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो. कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, माकपा और कुछ अन्य राजनीतिक पार्टियां भी इस विधेयक के विरोध में हैं. इसमें छह धर्मों के शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात की गई है.

सूत्रों ने बताया कि 1955 के नागरिकता अधिनियम को संशोधन करने वाले विधेयक को अगले दो दिन में संसद में पेश किया जा सकता है. भाजपा ने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में यह वादा किया था.

नागरिकता अधिनियम 1955 में प्रस्तावित संशोधन पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के हिंदू, सिखों, बौद्ध, जैन, पारसियों और ईसाइयों को भारत की नागरिकता देने की बात कहता है, भले ही उनके पास कोई उचित दस्तावेज नहीं हों.

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, माकपा और कुछ अन्य राजनीतिक पार्टियां भी इस विधेयक का विरोध कर रही हैं और उनका कहना है कि धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं दी जा सकती है.

भाजपा नीत राजग ने अपने पिछले कार्यकाल में लोकसभा में इस संशोधन विधेयक को पेश किया था और इसे पारित करा लिया था लेकिन पूर्वोत्तर में जबर्दस्त विरोध होने की वजह से इसे राज्यसभा में पेश नहीं कर पाई थी.