नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को लेटर लिखकर कहा है कि विदेश से आने वाले भारतीयों को अब 7 दिन तक क्वारंटाइन में रहना होगा. बता दें कि सरकार ने कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन के कारण विदेशों में फंसे भारतीयों की वापसी के लिए रविवार को मानक संचालन प्रोटोकॉल (एसओपी) जारी किया था और कहा कि इस सेवा के लिए उन्हें भुगतान करना होगा और गर्भवती महिलाओं के साथ ही उन लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो परेशानी में हों या जिनकी नौकरी छूट गई हो.Also Read - Haryana में कोरोना पाबंदियों में ढील, 50 फीसदी क्षमता के साथ खुलेंगे सिनेमाघर-मल्टीप्लेक्स; स्कूलों को लेकर यह हुआ फैसला

मंगलवार को केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्य मुख्य सचिवों से कहा कि “विदेश से लौटने के बाद होटलों में क्वारंटाइन किए गए भारतीयों ने 14 दिनों के लिए अग्रिम भुगतान किया था. अब वे 7 दिनों के बाद घर जा सकते हैं, बाकी 7 दिनों की राशि उनको वापस दी जाए. कुछ होटल इसके लिए मना कर रहे हैं.” पत्र में आगे कहा गया, ‘आपसे अनुरोध है कि संस्थागत क्वारंटाइन के लिए इस्तेमाल किए गए होटलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि 14 दिनों के अग्रिम भुगतान किए गए लोगों की शेष राशि बिना किसी देरी के वापस की जाए.’ Also Read - UP School News: योगी सरकार का आदेश- यूपी में स्कूल और सभी शिक्षण संस्थान 6 फरवरी तक रहेंगे बंद

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24 मई को जारी केंद्र सरकार की एसओपी के मुताबिक सभी यात्रियों को यह वचन देना होगा कि वे 14 दिन के अनिवार्य पृथक-वास (quarntine) में रहेंगे. इसमें सात दिन के संस्थागत पृथक-वास के लिए उन्हें भुगतान करना होगा और इसके बाद सात दिनों तक उन्हें घर पर पृथक रहना होगा तथा अपने स्वास्थ्य पर खुद नजर रखनी होगी. इसमें कहा गया कि बेहद अपवाद स्वरूप और बाध्यकारी वजहों से ही घर पर 14 दिनों के पृथक-वास की इजाजत दी जा सकती है और ऐसे मामलों में आरोग्य सेतु ऐप का इस्तेमाल अनिवार्य होगा.

गृह मंत्रालय द्वारा इससे पहले पांच मई को जारी एसओपी के अनुसार संस्थागत पृथकवास के लिये 14 दिन और फिर उसके बाद घर पर पृथक-वास के लिए 14 दिन की अवधि निर्धारित की गई थी जबकि विदेश से आने वाले सभी लोगों के लिए आरोग्य सेतु ऐप अनिवार्य था. हालांकि नए एसओपी में कहा गया है कि राज्य और केंद्र शासित क्षेत्र पृथक-वास को लेकर स्थिति के आकलन के बाद अपने खुद के प्रोटोकॉल विकसित कर सकते हैं.

सरकार अभी ‘वंदे भारत मिशन’ के नाम से एक अभियान चला रही है जिसके तहत 40 से ज्यादा देशों में फंसे भारतीयों को वापस लाया जा रहा है. केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम एसओपी के मुताबिक जो लोग विदेश से भारत आना चाहते हैं उन्हें विदेश मंत्रालय द्वारा बताए गए आवश्यक विवरण के साथ उस देश में भारतीय मिशन में पंजीकरण कराना होगा.