नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई का कहना है कि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार का अंतिम संस्कार मंगलवार की दोपहर किया जाएगा. भाजपा के प्रदेश महासचिव एन रवि कुमार ने एक बयान में कहा कि कुमार के पार्थिव शरीर को सोमवार दिन भर बसवानागुड़ी स्थित उनके आवास पर रखा जाएगा. उन्होंने बताया कि मंगलवार को सुबह आठ बजे अनंत कुमार के पार्थिव शरीर को मल्लेश्वरम स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय, जगन्नाथ भवन ले जाया जाएगा जहां पार्टी कार्यकर्ताओं एवं उनके समर्थकों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि दिए जाने की व्यवस्था की जाएगी.

बयान में कहा गया कि बाद में कुमार के पार्थिव शरीर को नेशनल कॉलेज ग्राउंड ले जाया जाएगा जहां आम लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे. कुमार का अंतिम संस्कार दोपहर एक बजे चामराजापेट श्मशान घाट पर किया जाएगा. महीनों तक फेफड़ों के कैंसर से जूझने के बाद कुमार का सोमवार तड़के बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया.

अनंत कुमार मौजूदा एनडीए सरकार में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री और रसायन एवं उर्वरक मंत्री थे. छह बार के सांसद कुमार आरएसएस कार्यकर्ता से केंद्रीय मंत्री बनने तक राजनीतिक सोपान तेजी से चढ़ते गए. कुमार भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के हमेशा करीब रहे. वह चाहे अटल बिहारी वाजपेयी या लालकृष्ण आडवाणी का दौर रहा हो या मौजूदा नरेंद्र मोदी का दौर.

वह 1987 में भाजपा में शामिल हुए और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. वह एबीवीपी के राज्य सचिव और राष्ट्रीय सचिव, भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और महासचिव रहे. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी एस येदियुरप्पा के साथ कुमार उन चंद पार्टी नेताओं में शामिल थे जिन्हें कर्नाटक में भाजपा के विस्तार का श्रेय दिया जा सकता है क्योंकि उन्होंने राज्य में संगठन को खड़ा किया और 2008 में पार्टी को राज्य की सत्ता तक पहुंचाया. दक्षिण भारत में तब भाजपा की पहली सरकार बनी थी. कुमार 1996 में पहली बार बेंगलुरु दक्षिण सीट से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और निधन होने तक यह क्षेत्र उनका गढ़ रहा.

22 जुलाई, 1959 को बेंगलुरू में एचएन नारायण शास्‍त्री और गिरिजा शास्‍त्री के घर अनंत कुमार का जन्‍म हुआ. उन्होंने केएस आर्ट्स कॉलेज से बीए की पढ़ाई की थी. उसके बाद जेएसएस लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री भी हासिल की थी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रभावित होने के कारण, वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र विंग के सदस्य थे. इंदिरा गांधी सरकार में लगाए गए आपातकाल के दौरान हजारों छात्र कार्यकर्ताओं के साथ उन्हें जेल भी जाना पड़ा था.