न्यूयॉर्क: केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने संकेत दिया कि किसानों को सालाना 6,000 रुपए के न्यूनतम सहायता राशि को भविष्य में बढ़ाया जा सकता है. जेटली ने रविवार को कहा कि सरकार के संसाधन बढ़ेंगे, जिससे भविष्य में किसानों को दी जाने वाली सालाना राशि को बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि राज्य इस राशि के ऊपर अपनी ओर से आय समर्थन योजनाओं की घोषणा कर सकते हैं. केंद्रीय मंत्री कहा कि किसानों को न्यूनतम आय समर्थन देने का यह पहला साल है. मुझे भरोसा है कि सरकार के संसाधन बढ़ने के साथ इस राशि को भी बढ़ाया जा सकता है. करीब 15 करोड़ भूमिहीन किसानों को इस योजना में शामिल नहीं करने के बारे में जेटली ने कहा कि उनके लिए ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मनरेगा और कई अन्य लाभ हैं. Also Read - Bihar Lychee Farmers: पहले से ही मौसम की मार झेल रहे बिहार के लीची किसानों को अब सताने लगा कोरोना का डर

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर हमला
वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने 2019-20 के बजट में किसानों को सालाना 6,000 रुपए की न्यूनतम सहायता देने की घोषणा की है. किसानों को यह राशि तीन किस्तों में दी जाएगी. इस लिहाज से यह 500 रुपए मासिक बैठती है. जेटली ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा इस योजना की आलोचना के लिए उन पर हमला बोला. गांधी ने कहा है कि सरकार किसानों को प्रतिदिन 17 रुपये देकर उनका अपमान कर रही है. जेटली ने कहा कि विपक्ष के नेता को परिपक्व होना चाहिए और उन्हें यह समझना चाहिए कि वह किसी कॉलेज यूनियन का चुनाव नहीं राष्ट्रीय चुनाव लड़ने जा रहे हैं. Also Read - अनिल विज ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को लिखा पत्र, 'प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत फिर शुरू करें'

12 करोड़ छोटे और सीमान्त किसानों को मिलेगा पैसा
जेटली ने न्यूज एजेंसी पीटीआई/भाषा से एक इंटरव्यू में कहा, 12 करोड़ छोटे और सीमान्त किसानों को हर साल 6,000 रुपए दिए जाएंगे. इसके अलावा सरकार की योजना उन्हें घर देने, सब्सिडी पर खाद्यान्न देने, मुफ्त चिकित्सा सुविधा देने, मुफ्त साफसफाई की सुविधा देने, बिजली, सड़क, गैस कनेक्शन देने की योजना तथा दोगुना कर्ज सस्ती दर पर देने जैसी सभी योजनाएं किसानों की दिक्कतों को दूर करने से जुड़ी हैं. Also Read - Farmers Protest: 10 अप्रैल को केएमपी एक्सप्रेस-वे 24 घंटे के लिए बंद रखेंगे किसान, लोगों संग अच्छे व्यवहार का वादा

चिदंबरम ने 70,000 करोड़ रुपए के एग्री लोन में सिर्फ 52,000 करोड़ बांटे
जेटली ने कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार कौन सा सबसे बड़ा काम करने का दावा करती है? पी चिदंबरम ने 70,000 करोड़ रुपए का कृषि ऋण माफ करने की घोषणा की थी. लेकिन वास्तव में सिर्फ 52,000 करोड़ रुपए वितरित किए गए. कैग ने भी कहा है कि इसमें एक बड़ी राशि व्यापारियों और कारोबारियों के पास चली गई. इस तरह से यह एक धोखाधड़ी है.

75,000 करोड़ रुपए सालाना से शुरुआत की है
जेटली ने कहा कि मौजूदा सरकार ने ग्रामीण इलाकों में जो लाखों करोड़ रुपये लगाए हैं यह राशि उसके अतिरिक्त है. उन्होंने कहा, हमने 75,000 करोड़ रुपये सालाना से शुरुआत की है. मुझे लगता है कि आगामी वर्षों में इसमें इजाफा होगा. यदि राज्य भी इसमें कुछ जोड़ते हैं तो यह राशि और बढ़ेगी. कुछ राज्यों ने इस बारे में योजना शुरू की है. मुझे लगता है कि और राज्य भी उनके रास्ते पर चलेंगे. जेटली यहां इलाज कराने आए हैं. उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की दिक्कतें दूर करने की जिम्मेदारी राज्यों की भी बनती है.

दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करेंगे
जेटली ने कहा कि कुछ राज्य सरकारों ने इसे शुरू किया है. ”मैं नकारात्मक सोच रखने वाले नवाबों से कहूंगा कि वे अपनी राज्य सरकारों से कहें कि इस समर्थन के ऊपर वे सरकारें भी कुछ मदद दें.” जेटली ने कहा कि आदर्श स्थिति यह होगी कि सभी राजनीतिक दल इस मामले में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करेंगे जैसा कि जीएसटी के मामले में हुआ है. वे केंद्र जमा राज्य की योजना बनाएं.

मुझे परेशानी तब होती है, जब पैसा (चुपके से) लोगों की जेब में चला जाता
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ज्यादातर केंद्रीय योजना 60:40 अनुपात में होती हैं. सहकारी संघवाद के सिद्धान्त के तहत आइए हम इसे भी 60:40 करें. आलोचना करने के बजाय राज्य सरकारों को 40 (प्रतिशत) दें तो सही. पी चिदंबरम द्वारा लेखानुदान को वोटों का हिसाब किताब बताने पर जेटली ने कहा कि इन दो मदों पर धन खर्च होने से मुझे कोई समस्या नहीं है. मुझे परेशानी तब होती है जबकि पैसा (चुपके से) लोगों की जेब में चला जाता है.