नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने गुरुवार को कहा कि हिंदुस्तान एरोनोटिक्स लि. (एचएएल) ने संभवत: इसलिए राफेल विमान सौदा गंवा दिया क्योंकि उसने इस लड़ाकू जेट विमान को बनाने में दसाल्ट के मुकाबले 2.57 गुना अधिक मानव-घंटे लगने की बात कही थी.Also Read - डसॉल्ट के मालिक ओलिवियर डसॉल्ट की हेलीकॉप्टर क्रैश में मौत, इसी कंपनी ने बनाई थी राफेल

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संप्रग सरकार द्वारा राफेल लड़ाकू विमानों के लिये की जा रही बातचीत के तहत फ्रांस की कंपनी दसाल्ट एविएशन के साथ मिलकर एचएएल को स्थानीय स्तर पर 108 लड़ाकू जेट विमान बनाने थे. उस समय 126 राफेल जेट विमानों के लिये सौदा हो रहा था. हालांकि, नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एचएएल सौदे से बाहर हो गयी क्योंकि मौजूदा सरकार ने फ्रांस से पूर्ण रूप से तैयार 36 लड़ाकू जेट खरीदने का समझौता किया. Also Read - केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- राफेल सौदे में FIR या CBI जांच का सवाल ही नहीं, मिल चुकी है क्लीन चिट

भारी उद्योग राज्य मंत्री सुप्रियो ने उद्योग मंडल सीआईआई द्वारा लोक उपक्रमों पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि एचएएल ने विमान बनाने को लेकर 257 मानव श्रम घंटे लगने की बात कही थी. वहीं दसाल्ट का कहना था कि यह 100 मानव श्रम घंटे में किया जा सकता है.

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उन्होंने कहा, ‘‘राफेल लड़ाकू विमान के उत्पादन के लिये जहां दसाल्ट ने कहा कि उसे 100 मानव कार्य घंटे चाहिए, वहीं एचएएल ने कहा कि उसे 257 मानव श्रम घंटे की आवश्यकता होगी. इसलिये वास्तव में यह एक बड़ा कारक था.’’

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मंत्री ने कहा कि मामले में राजनीतिक विवाद हो सकता है लेकिन उनकी बात इस मामले में आर्थिक मुद्दे पर है. बाद में मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी सार्वजनिक उपक्रमों को लेकर थी कि उन्हें यह आकलन करना है कि वैश्वीकरण के दौर में वह कैसे निजी कंपनियों से बराबरी कर सकती हैं. एचएएल बेंगलुरू की कंपनी है और रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आती है.