नई दिल्ली: केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने शनिवार को कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निरोधक कानून पर फैसला सुनाने वाली पीठ में शामिल रहे न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष पद से तत्काल हटाया जाना चाहिए. अठावले ने एक बयान जारी कर यह भी कहा कि गोयल की नियुक्ति के मामले को वह जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष उठाएंगे. Also Read - मेरा दिया हुआ नारा 'गो कोरोना गो' पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो गया है: आठवले

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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस ए.के. गोयल को एनजीटी अध्यक्ष बनाने के विरोध में दलित: बीजेपी एमपी Also Read - जेपी नड्डा ने शुरू किया 'सहयोग' कार्यक्रम, BJP मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री लगाएंगे जनता दरबार, सुनी जाएगी लोगों की तकलीफें

बता दें कि इससे पहले 24 जुलाई को बीजेपी सांसद उदित राज ने जस्टिस गोयल को एनजीटी के अध्यक्ष पद पर हटाने की मांग संसद में की थी. केंद्र में मोदी सरकार में शामिल दलित केंद्रीय मंत्री और उनके पार्टी के सांसद ही सरकार के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं और दलित सियासत के सारे दाव सरकार में खेल रहे हैं. इससे मोदी सरकार की छवि पर विपरीत असर पड़ सकता है. दलित सियासत का निशाना इस वक्त जस्टिस गोयल बन गए हैं.

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अठावले ने कहा, ” न्यायमूर्ति गोयल की नियुक्ति से देश के दलित समाज में नाराजगी है. केंद्र सरकार को उन्हे इस पद से तत्काल हटा देना चाहिए.” आरपीआई नेता ने यह भी कहा कि गोयल की नियुक्ति का कई दलित सांसद भी विरोध कर चुके हैं.

अठावले से पूर्व लोकजनशक्ति पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और उनके बेटे ने इसी मुद्दे को लेकर जस्टिस गोयल को हटाने के मांगी कर चुकी है.

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बीजेपी सांसद उदित राज ने बीते 24 जुलाई को कहा कि एसटीएससी एट्रोसिटी एक्ट के संदर्भ में फैसले देने वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ में शामिल रहे एक न्यायाधीश को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने से दलितों को तकलीफ हुई है और वे इसका विरोध कर रहे हैं.

बीजेपी सांसद ने 24 जुलाई को ट्वीट कर कहा, ”लोक सभा में मैंने कहा कि सरकार ने अनेकों दलित विरोधी फैसले देने वाले पूर्व न्यायधीश श्री ए.के गोयल को NGT जैसे महत्वपूर्ण प्राधिकरण का चेयरमेन नियुक्त किया है जो एकतरह से उनको पदोन्नति देने जैसा है. सरकार के द्वारा इस नियुक्ति के खिलाफ दलित समुदाय में रोष एवं निराशा का भाव है.” (इनपुट- एजेंसी)